रायपुर में अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन बहाली का मामला अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंच गया है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर करीब 40 वर्षों से चली आ रही पेंशन और ग्रेज्युटी व्यवस्था बंद किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार कर बुजुर्ग पेंशनरों को राहत देने की मांग की है।
चार दशक पुरानी व्यवस्था अचानक बंद करने पर सवाल
सांसद ने अपने पत्र में बताया कि प्रदेश के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में लंबे समय तक सेवा देने वाले प्राध्यापकों और कर्मचारियों को करीब चार दशकों से पेंशन और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ मिलते रहे हैं। विभागीय आदेश के तहत पांचवें वेतनमान के आधार पर यह व्यवस्था लागू थी। लेकिन उच्च शिक्षा विभाग के 1 सितंबर 2026 के नए आदेश के जरिए इसे अचानक समाप्त कर दिया गया।
पेंशन बंद होने से बुजुर्गों के सामने आर्थिक संकट
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पेंशन व्यवस्था खत्म होने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिन लोगों ने अपना पूरा सेवाकाल उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगाया, उन्हें अब बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
70 से 90 साल की उम्र में पेंशन ही सहारा
सांसद ने मुख्यमंत्री से मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पेंशनर 70 से 90 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं। इस उम्र में दवाइयों, इलाज, रोजमर्रा के खर्च और दूसरी जरूरतों के लिए नियमित पेंशन ही उनका मुख्य सहारा है। ऐसे में अचानक पेंशन बंद होना उनके लिए बड़ी परेशानी बन गया है।
CM साय से आदेश पर रोक लगाने की मांग
बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उच्च शिक्षा विभाग के नए आदेश को तत्काल निरस्त करने या उस पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार को बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील फैसला लेना चाहिए।
पेंशन और ग्रेज्युटी भुगतान जारी रखने की अपील
सांसद ने पात्र सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पूर्व व्यवस्था के अनुसार पेंशन और ग्रेज्युटी का भुगतान जारी रखने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार के इस कदम से बुजुर्ग पेंशनरों को तत्काल राहत मिल सकती है। अब नजर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर है कि सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है।