भोपाल। 'राहुल गांधी इतने दिनों बाद बालाघाट आ रहे हैं। विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें नक्सल प्रभावित क्षेत्र की पुरानी परिस्थितियों और वहां के लोगों की समस्याओं को लेकर संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। आज उनका वहां पहुंचना केवल राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास है। जिन समस्याओं को कांग्रेस की नीतियों से बढ़ावा मिला, आज वही कांग्रेसी संवेदना की बात कर रहे हैं। राहुल गांधी बार-बार भ्रामक बातें कहकर लोगों को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।' यह बात उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कही। वे 30 सितंबर को मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बालाघाट लंबे समय तक नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्षों पुरानी नक्सल समस्या को समाप्त करने में सफलता मिली है।
उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि सरकार ने नक्सलवाद के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया। आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं की पहुंच बढ़ाई गई, टीकाकरण, ओआरएस-जिंक वितरण सहित नागरिक सुविधाओं का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित किया गया और अतिरिक्त सीडीपीओ की पदस्थापना की गई। आज बालाघाट नक्सल मुक्त होकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में वहां राजनीतिक कार्यक्रम करना केवल राजनीति के लिए राजनीति है। यदि कठिन परिस्थितियों के समय राहुल गांधी वहां आते और लोगों के साथ खड़े होते, तो उनकी संवेदनशीलता दिखाई देती।
डॉक्टरों की कमी की दूर
उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए 3,100 से अधिक डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई है, जिनमें से 2,600 से अधिक डॉक्टरों ने पदभार ग्रहण कर लिया है। इससे लंबे समय से चली आ रही डॉक्टरों की कमी अब काफी हद तक दूर होगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 25 से 30 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। यहां निःशुल्क जांच, दवाइयों के साथ मातृ-शिशु स्वास्थ्य, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों की समय पर जांच व उपचार की सुविधा मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाएगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेकेंडरी और टर्शियरी केयर के साथ अब प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।
बड़ी चूनौती को दिया दूर
उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि बालाघाट के दो ब्लॉकों के 50 गांवों में अब हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण के बाद ही इन दूरस्थ क्षेत्रों में नियमित रिपोर्टिंग और प्रशासनिक पहुंच संभव हो पाई है। पहले अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना भी चुनौती थी। कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है। वर्ष 2003 से पहले जहां संस्थागत प्रसव का स्तर केवल 21 प्रतिशत था, आज यह बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इन व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। नक्सलवाद देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा था। भाजपा सरकार ने इसे प्राथमिकता के साथ समाप्त करने की दिशा में निर्णायक काम किया है। इसी का परिणाम है कि आज बालाघाट के दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं।
सीएम डॉ. यादव खुद कर रहे मॉनिटरिंग
उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि दिसंबर 2025 में क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के बाद ही वहां नियमित रिपोर्टिंग और प्रशासनिक पहुंच प्रभावी रूप से शुरू हो सकी। पहले नक्सलवाद के कारण अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना भी मुश्किल था, लेकिन अब हर घटना की रिपोर्टिंग और निगरानी संभव है। सबसे प्रभावित दो ब्लॉकों में सरकार ने तेजी से स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार किया है। 14 नए स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 30-बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में परिवर्तित किया गया है। साथ ही 2 नए पीएचसी, 2 सीएचसी और 10 उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। हर घर और हर बच्चे तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 4 नए सीडीओपी तथा 52 अतिरिक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं की पदस्थापना की गई है। वर्ष 2003 से पहले जहां संस्थागत प्रसव का स्तर 21 प्रतिशत था, आज यह बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं और सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।