पंजाब में पंथिक सम्मेलन से पहले बढ़े मतभेद, कई संगठनों ने बनाया किनारा

पंजाब में पंथिक सम्मेलन विवाद

पंजाब में पंथिक सम्मेलन से पहले बढ़े मतभेद, कई संगठनों ने बनाया किनारा

5 जुलाई को पंजाब में होने वाले पंथिक सम्मेलन से पहले ही कई सिख संगठनों ने बहिष्कार का निर्णय लिया, जिससे राजनीतिक और धार्मिक विवाद गहरा गया है।

पंजाब में पंथिक सम्मेलन से पहले बढ़े मतभेद कई संगठनों ने बनाया किनारा

पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवाद को लेकर 5 जुलाई को अमृतसर के गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में प्रस्तावित पंथिक सम्मेलन से पहले ही सिख संगठनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य अकाल तख्त के निर्देशों के प्रति सिख समाज को जागरूक करना बताया गया है, लेकिन कार्यक्रम से पहले ही कई पंथिक संगठनों ने इससे दूरी बनाने और बहिष्कार का फैसला कर लिया है।

बहिष्कार का फैसला कर लिया

कुछ संगठनों का आरोप है कि उन्हें सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण ही नहीं भेजा गया। सिख फेडरेशन भिंडरांवाला के भाई रंजीत सिंह ने बताया कि समान विचारधारा वाले कई पंथिक संगठनों की बैठक में सर्वसम्मति से सम्मेलन का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। उनका आरोप है कि शिरोमणि अकाली दल से जुड़े सदस्यों के प्रभाव वाली एसजीपीसी इस सम्मेलन का इस्तेमाल शिरोमणि अकाली दल की राजनीतिक प्रासंगिकता को फिर से स्थापित करने के लिए कर रही है।

पंथिक संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा

यह विवाद उस प्रस्ताव के बाद सामने आया, जिसमें एसजीपीसी के सामान्य सदन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर अकाल तख्त के निर्देश का समर्थन किया था। इसी प्रस्ताव के तहत 5 जुलाई को पंथिक सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन की घोषणा करते समय अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने कहा था कि सभी सिख संप्रदायों और पंथिक संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा।

राजनीतिक राजनीति में नई बहस छेड़ दी

हालांकि, शिरोमणि अकाली दल (पुनर्गठित) के मुख्य प्रवक्ता जगजीत सिंह कोहली ने दावा किया कि उनकी पार्टी को अब तक कोई निमंत्रण नहीं मिला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सभी संगठनों को बुलाने की बात कही गई थी, तो उनकी पार्टी को क्यों नजरअंदाज किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से स्पष्टीकरण मांगना अकाल तख्त का अधिकार है, लेकिन सिख विधायकों और मंत्रियों को भी तलब किए जाने से मामला धार्मिक दायरे से निकलकर राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है।

पंथिक सम्मेलन से पहले उभरे इन मतभेदों ने पंजाब की धार्मिक और राजनीतिक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें 5 जुलाई को होने वाले सम्मेलन पर टिकी हैं कि इसमें किन-किन संगठनों की भागीदारी होती है और इसका आगे क्या प्रभाव पड़ता है।

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