पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है। इसको लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति तैयार कर ली। राज्य में कांग्रेस में गुटबाजी थी, लेकिन अब आलाकमान ने इस गुटबाजी को दूर कर दिया है। बताया जाता है कि पंजाब में बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी इस कदर थी कि वे पास में भी नहीं बैठते थे। लेकिन आने वाले चुनाव को लेकर राहुल गांधी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पार्टी के 5 बड़े नेताओं को दिल्ली बुलाया और एक साथ मुलाकात भी की।
कांग्रेस की लिस्ट
इस मामले को हैंडल करने के लिए पार्टी ने प्रियंका गांधी को जिम्मा सौंपा है। जो कि अब सुलझता हुआ नजर आ रहा है। पंजाब में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थी। माना जा रहा था कि अमरिंदर सिंह राजा के नेतृत्व में कांग्रेस विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेगी। लेकिन अब कांग्रेस ने चुनाव से पहले एक लिस्ट जारी की है। जिसमें पार्टी ने अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है।
किसको क्या मिली जिम्मेदारी
दरअसल, पूर्व CM और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए पूरी ताकत लगाई थी। वहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी अध्यक्ष बनने का दावा ठोका। लेकिन पार्टी ने अमरिंदर को ही प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बने रहने के लिए कहा। कांग्रेस का कोर कमेटी का चेयरपर्सन सुखजिंदर सिंह रंधावा को बनाया गया है। विजय इंद्र सिंघला को इलेक्शन मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। अमर सिंह मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष होंगे।
बदलाव के बाद नाराजगी
वहीं पंजाब कांग्रेस में हाईकमान के बदलाव के बाद नाराजगी बढ़ गई है। चंडीगढ़ सांसद मनीष तिवारी ने उन्हें किनारे किए जाने को लेकर X पर लिखा- काश मेरे पास व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षा (हीनभावना) का भी कोई प्रतिरोधक (एंटीडोट/विषनाशक) होता।