मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी और खाद वितरण के लिए ई-टोकन व्यवस्था की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने भोपाल कूच का ऐलान किया था। लेकिन पुलिस-प्रशासन ने किसानों को रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद आंदोलनकारी नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर धरने पर बैठ गए।
कई जिलों में पुलिस ने की कार्रवाई
किसानों के भोपाल मार्च को देखते हुए नर्मदापुरम, हरदा, इटारसी, डोलरिया, सिवनी मालवा और पिपरिया समेत कई इलाकों में पुलिस ने बैरिकेडिंग और चेकिंग अभियान चलाया। प्रशासन ने कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया या नजरबंद कर दिया। जानकारी के अनुसार हरदा में 25 और नर्मदापुरम में 14 किसान नेताओं व पदाधिकारियों पर कार्रवाई की गई।
सेठानी घाट पर शुरू हुआ धरना
भोपाल नहीं पहुंच पाने के बाद बड़ी संख्या में किसान नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर जमा हो गए। यहां किसानों ने टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया। आंदोलनकारियों ने नारेबाजी की और हनुमान चालीसा का पाठ कर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
किसान नेताओं ने दी चेतावनी
राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष राकेश गौर ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों को आगे बढ़ने से रोका गया तो सेठानी घाट पर ही अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ किसी तरह की जबरदस्ती की गई तो वे बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
बैरिकेडिंग से यातायात प्रभावित
किसानों को रोकने के लिए शहर के कई प्रवेश मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। भोपाल चौराहे पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया और लोगों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा गया। इससे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी।
प्रशासन ने कहा- कानून व्यवस्था के लिए इंतजाम
एएसपी अभिषेक राजन ने बताया कि किसी को जबरन नहीं रोका जा रहा है, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। वहीं किसान संगठनों ने अपील की है कि जहां किसानों को रोका गया है, वहीं धरना जारी रखें और आंदोलन को मजबूत करें।