मध्य प्रदेश सरकार निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों के लिए नई स्कॉलरशिप योजना शुरू करने की तैयारी में है। ‘भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिक श्री मेधा छात्र उन्नयन योजना’ के तहत चयनित विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के दौरान हर महीने 7,500 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मध्य प्रदेश में निर्माण श्रमिकों के मेधावी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक मदद देने की तैयारी की जा रही है। सरकार ने इसके लिए योजना का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे गजट नोटिफिकेशन के लिए भेजा जाना है। प्रस्ताव है कि योजना को इसी साल लागू किया जाए।
इस योजना की खास बात यह है कि सिर्फ कॉलेज की पढ़ाई ही नहीं, बल्कि NEET, JEE और CLAT जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का खर्च भी इसमें शामिल होगा।
हर साल 500 विद्यार्थियों का चयन
योजना के तहत हर साल अधिकतम 500 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। इनमें 20 प्रतिशत सीटें छात्राओं के लिए आरक्षित रहेंगी।
विद्यार्थियों का चयन मध्य प्रदेश बोर्ड और CBSE के नियमित विद्यार्थियों की संयुक्त मेरिट के आधार पर किया जाएगा। यानी पात्रता पूरी करने वाले हर विद्यार्थी को 7,500 रुपए की सहायता मिलना तय नहीं होगा। सीमित सीटों के कारण मेरिट के आधार पर चयन किया जाएगा।
किन छात्रों को मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं। इनमें बच्चे के माता या पिता का मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत निर्माण श्रमिक होना जरूरी है।
इसके अलावा निर्धारित अवधि से श्रमिक का पंजीयन होना चाहिए और कम से कम 90 दिन काम करने का रिकॉर्ड भी जरूरी होगा। विद्यार्थी के लिए 10वीं कक्षा में कम से कम 80 प्रतिशत अंक हासिल करना आवश्यक होगा।
योजना के तहत विद्यार्थी की उम्र भी निर्धारित सीमा में होनी चाहिए।
NEET-JEE और CLAT की कोचिंग का खर्च भी शामिल
चयनित विद्यार्थियों को मिलने वाली सहायता का इस्तेमाल सिर्फ ट्यूशन फीस के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसमें किताबें, हॉस्टल और अन्य शैक्षणिक खर्च भी शामिल होंगे।
इसके अलावा विद्यार्थी अपनी रुचि और करियर के अनुसार NEET, JEE या CLAT जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग फीस पर भी इस सहायता का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव से राहत मिलने की उम्मीद है।
12वीं में 75% अंक जरूरी
योजना का लाभ आगे भी जारी रखने के लिए विद्यार्थियों को 12वीं कक्षा में कम से कम 75 प्रतिशत अंक हासिल करना होगा। इसके साथ ही हर साल निर्धारित समय पर ऑनलाइन आवेदन करना भी जरूरी होगा।
यानी 10वीं में 80 प्रतिशत अंक हासिल करने के बाद योजना में चयन होने पर भी छात्र को आगे की सहायता के लिए निर्धारित शैक्षणिक प्रदर्शन बनाए रखना होगा।
ऐसे समझें योजना का पूरा गणित
मान लीजिए किसी निर्माण श्रमिक का बच्चा MP बोर्ड या CBSE का नियमित विद्यार्थी है और उसने 10वीं में 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा अंक हासिल किए हैं। उसकी उम्र निर्धारित सीमा में है और उसके माता-पिता का निर्माण श्रमिक के तौर पर जरूरी अवधि से पंजीयन है।
अगर 90 दिन काम करने की शर्त भी पूरी है, तो वह योजना के लिए आवेदन कर सकता है।
लेकिन केवल आवेदन करने से हर महीने 7,500 रुपए मिलना तय नहीं होगा। पात्र विद्यार्थियों की मेरिट तैयार होगी और हर साल अधिकतम 500 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
चयन के बाद उच्च शिक्षा के दौरान ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल और अन्य शैक्षणिक खर्चों के साथ NEET, JEE या CLAT जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी आर्थिक सहायता मिल सकेगी।