जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) की ओर से कश्मीरी पंडितों के नाम एक और धमकी भरी चिट्ठी जारी किए जाने की बात सामने आई है। दावा है कि यह एक महीने में जारी की गई छठवीं चिट्ठी है। इस बार निशाने पर प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कश्मीर में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारी हैं। चिट्ठी में कर्मचारियों के फोन नंबर, पते और गाड़ियों की जानकारी होने का दावा किया गया है। साथ ही गैर-स्थानीय कर्मचारियों के शव उनके घर भेजने की धमकी दी गई है। धमकी के बाद कई कर्मचारियों ने दफ्तर जाना बंद कर दिया, जबकि कुछ जम्मू लौट गए हैं।
शेखूपुरा में बढ़ी सुरक्षा
बडगाम जिला मुख्यालय से करीब 3 किलोमीटर दूर शेखूपुरा में कश्मीरी पंडितों की बड़ी कॉलोनी है। यहां करीब 330 परिवार रहते हैं। कॉलोनी चारों तरफ से करीब 12 फीट ऊंची दीवारों से घिरी है और सुरक्षा के लिए पुलिस व CRPF के जवान तैनात हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पहले कॉलोनी से बाहर आने-जाने में इतनी सख्ती नहीं थी। अब गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को बाहर जाने वाले लोगों की जानकारी दर्ज करनी पड़ रही है। लोगों को आईडी कार्ड साथ रखने के लिए कहा गया है और शाम 4 बजे से पहले वापस लौटने की हिदायत दी जा रही है।
6000 कर्मचारी सुरक्षा घेरे में
2008 के प्रधानमंत्री पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर में करीब 6000 कश्मीरी पंडितों को नौकरी और आवास दिए गए हैं। इनमें से कई परिवार शेखूपुरा, कुलगाम के वुस्सू कैंप, बारामुला और कुपवाड़ा में रहते हैं। इन कॉलोनियों में सुरक्षा व्यवस्था चौबीसों घंटे रहती है। वुस्सू कैंप में करीब 426 परिवार रहते हैं, जो इन कॉलोनियों में सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है। धमकी सामने आने के बाद इन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी किए जाने की बात सामने आई है।
परिवारों की चिंता बढ़ी
शेखूपुरा में रहने वाले कुछ परिवारों ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर अपनी चिंता साझा की। एक परिवार ने बताया कि अब डॉक्टर के पास जाने या राशन लेने जैसे सामान्य कामों के लिए भी सुरक्षाकर्मियों को पहले जानकारी देनी पड़ रही है। परिवार के मुताबिक, बच्चों को स्कूल भेजने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर बार-बार फोन करना पड़ता है। कुछ परिवारों के यहां से चले जाने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं, एक परिवार का कहना है कि कॉलोनी के अंदर सुरक्षा को लेकर उन्हें ज्यादा डर नहीं है, क्योंकि जवान लगातार तैनात रहते हैं। हालांकि स्कूल बसों के कॉलोनी के अंदर नहीं आने से अभिभावकों को बच्चों को गेट तक छोड़ने और लेने जाना पड़ रहा है।
डेटा लीक पर भी सवाल
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के एक पदाधिकारी ने कर्मचारियों की निजी जानकारी आतंकियों तक पहुंचने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर किसी विभाग ने हाल में कर्मचारियों का डेटा जुटाया था, तो इतनी जल्दी यह जानकारी आतंकियों तक कैसे पहुंची, इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं, कश्मीरी पंडितों के संगठन ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल से मामले की जांच कराने के साथ कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। अब सुरक्षा एजेंसियां इस धमकी के स्रोत और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की जांच में जुटी हैं