नई सड़क झारखंड के विकास को गति देगी

CM हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा तक पहुंच होगी आसान, नई सड़क बनने से 30 किमी घटेगी दूरी

बरलंगा-कसमार-नेमरा सड़क के निर्माण से झारखंड में विकास और इतिहास को जोड़ने की उम्मीद, यात्रा की दूरी और समय दोनों कम होंगे।

CM हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा तक पहुंच होगी आसान, नई सड़क बनने से 30 किमी घटेगी दूरी

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा तक पहुंचना जल्द ही पहले से कहीं अधिक आसान होने वाला है। बोकारो को नेमरा से जोड़ने वाले बरलंगा–कसमार–नेमरा सड़क मार्ग के निर्माण कार्य में तेजी लाई गई है। इस सड़क के तैयार होने के बाद न केवल क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा, बल्कि बोकारो और नेमरा के बीच की दूरी में भी करीब 30 किलोमीटर की कमी आएगी।

निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार

स्टेट हाईवे अथॉरिटी ऑफ झारखंड (SHAJ) के तहत बन रही इस सड़क परियोजना पर लंबे समय से काम चल रहा था। कसमार प्रखंड के चौड़ा गांव से गोला प्रखंड के सुथरपुर जंगल तक अधूरी पड़ी सड़क के निर्माण को अब तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

पहाड़ी क्षेत्र में आवश्यक पेड़ों की कटाई पूरी होने के बाद अब पहाड़ को समतल कर सड़क निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

30 किलोमीटर तक कम होगी दूरी

फिलहाल कसमार से गोला होते हुए नेमरा पहुंचने के लिए लगभग 53 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। नई सड़क बनने के बाद पिरगुल मार्ग से यह दूरी घटकर 20 से 22 किलोमीटर रह जाएगी। यानी यात्रियों को करीब 30 किलोमीटर कम दूरी तय करनी होगी।

वहीं, बोकारो से नेमरा की कुल दूरी भी लगभग 100 किलोमीटर से घटकर करीब 60 किलोमीटर रह जाने का अनुमान है, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों कम होंगे।

कई जिलों को मिलेगा सीधा लाभ

नई सड़क का लाभ केवल कसमार और गोला प्रखंड तक सीमित नहीं रहेगा। इसके शुरू होने से बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा और दुमका से आने-जाने वाले लोगों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।

इसके अलावा टाटा, जमशेदपुर और चाईबासा की दिशा में यात्रा करने वालों के लिए भी यह मार्ग एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक सड़क के रूप में उभरेगा, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और मजबूत होगा।

झारखंड आंदोलन से जुड़ा है ऐतिहासिक महत्व

यह सड़क केवल एक आधारभूत ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के इतिहास से भी गहराई से जुड़ी हुई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष और धानकटनी आंदोलन के दौरान दिशोम गुरु शिबू सोरेन प्रशासन की नजरों से बचते हुए नेमरा से बरगा, सुथरपुर, चौड़ा, भस्की, बेलडीह और वनचास के घने जंगलों से होकर जैनामोड़ (बोकारो) तक पैदल आवाजाही किया करते थे।

झारखंड आंदोलन के वरिष्ठ सहभागी और 85 वर्षीय देवशरण हेंब्रम के अनुसार, शिबू सोरेन के पिता सोबरन सोरेन की हत्या के बाद महाजनी प्रथा के खिलाफ शुरू हुआ संघर्ष आगे चलकर झारखंड आंदोलन की मजबूत नींव बना। उस दौर में यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था और यही मार्ग आंदोलनकारियों का प्रमुख संपर्क रास्ता हुआ करता था।

विकास को मिलेगी नई रफ्तार

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर भी मिलेंगे।

साथ ही, झारखंड आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

यदि निर्माण कार्य तय समय पर पूरा हो जाता है, तो बरलंगा–कसमार–नेमरा सड़क मार्ग झारखंड के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजना साबित होगा, जो विकास और इतिहास दोनों को एक साथ जोड़ने का काम करेगा।

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