मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीकमगढ़ की प्रसिद्ध पीतल शिल्पकला को प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा बताते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की बात कही। मुख्यमंत्री 21 अगस्त को मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत टीकमगढ़ पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रसिद्ध पीतल शिल्पकार लक्ष्मीनारायण सोनी के रोरैया मोहल्ला स्थित घर पहुंचकर पारंपरिक शिल्पकला की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और कारीगरों के हुनर की सराहना की।
मुख्यमंत्री के दौरे में इससे पहले ‘उद्यम संवाद’ कार्यक्रम भी आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने जिले के उद्यमियों, निवेशकों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान औद्योगिक विकास, निवेश को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्योगों को नई संभावनाओं से जोड़ने को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।
देवी-देवताओं की पीतल प्रतिमाओं का किया अवलोकन
शिल्पकार लक्ष्मीनारायण सोनी के आवास पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीतल से तैयार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं सहित अन्य कलात्मक उत्पादों को देखा। उन्होंने शिल्प निर्माण की प्रक्रिया और इससे जुड़े कारीगरों के कौशल के बारे में जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टीकमगढ़ की पीतल शिल्पकला केवल स्थानीय पहचान नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस कला को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी।
धर्मपुरा में बनेगा नया औद्योगिक क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने पीतल शिल्प उद्योग को मजबूत आधार देने के लिए अधिकारियों को परियोजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने एमएसएमई विभाग के अधिकारियों से कहा कि भारत सरकार की MSE-CDP योजना के तहत ग्राम धर्मपुरा, तहसील टीकमगढ़ में प्रस्तावित नए औद्योगिक क्षेत्र का विकास जल्द पूरा किया जाए।
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 10.99 करोड़ रुपये बताई गई है। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को इसके त्वरित विकास के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना पूरी होने के बाद स्थानीय शिल्पकारों को आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
कारीगरों को मिलेंगे बेहतर बाजार और रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए औद्योगिक क्षेत्र के विकास से पीतल शिल्प से जुड़े कारीगरों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं और विपणन के नए अवसर मिलेंगे। इससे पारंपरिक कला को बाजार से जोड़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

सरकार का जोर पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर बाजार और रोजगार से जोड़ने पर है, ताकि टीकमगढ़ की सदियों पुरानी पीतल कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ इसे आर्थिक गतिविधियों का मजबूत आधार भी बनाया जा सके।