मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के जावर स्थित प्रसिद्ध लाखन धाम में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां 38 वर्षीय युवक ने कथित रूप से जिंदा समाधि ले ली। जानकारी के अनुसार भोपाल निवासी सोनू पुष्पद, पिता नंदकिशोर पुष्पद, मंगलवार शाम करीब 4 बजे समाधि में बैठे थे। करीब 20 घंटे बाद बुधवार सुबह उन्हें जीवित बाहर निकाला गया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया और प्रशासन भी हरकत में आ गया।
पहले भी कई बार ले चुका है जिंदा समाधि
बताया जा रहा है कि सोनू पुष्पद पहली बार ऐसा नहीं कर रहे थे। स्थानीय लोगों के अनुसार वह इससे पहले भी करीब 15 बार जिंदा समाधि ले चुके हैं। हालांकि इस बार बिना प्रशासनिक अनुमति और पुलिस को सूचना दिए इस तरह की गतिविधि किए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर इस बार नियमों की अनदेखी क्यों की गई।
पुलिस को देर से मिली जानकारी
घटना का सबसे गंभीर पहलू यह माना जा रहा है कि लाखन धाम समिति और संबंधित लोगों ने समय रहते पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं दी। पुलिस को इस पूरे मामले की सूचना कई घंटे बाद मिली, जिसके बाद अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। प्रशासन की मौजूदगी में युवक को सुरक्षित बाहर निकाला गया। समय पर सूचना न मिलने को लेकर अब संबंधित पक्षों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अनुमति और जिम्मेदारी की होगी जांच
जावर तहसीलदार ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि जिंदा समाधि की अनुमति किस आधार पर दी गई थी और क्या इसके लिए प्रशासन से कोई स्वीकृति ली गई थी। साथ ही लाखन धाम समिति और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
आस्था और सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी
यह घटना एक बार फिर धार्मिक आस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों में प्रशासन को पहले से सूचना देना और सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। फिलहाल प्रशासन मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रहा है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।