मध्यप्रदेश में बाढ़ राहत कार्य

दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे सीएम डॉ. मोहन, की अतिवृष्टि-राहत कार्यों की समीक्षा, जानें क्या दिए निर्देश?

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव ने रीवा, शहडोल, और जबलपुर में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

By : शिवम् पांडेय
दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे सीएम डॉ. मोहन, की अतिवृष्टि-राहत कार्यों की समीक्षा, जानें क्या दिए निर्देश?

भोपाल/ रीवा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 अगस्त को नई दिल्ली से रीवा पहुंचे। उन्होंने यहां रीवा संभाग-शहडोल संभाग-जबलपुर के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों के साथ अति वृष्टिऔर चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जहां अभी भी बाढ़ का पानी है, वहां राहत कैंप अच्छी तरह से संचालित किए जाएं। राहत कैंपों में समुचित मात्रा में खाद्य सामग्री, पीने के पानी एवं चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करें। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यदि लोगों का खाने-पीने का सामान, घर इत्यादि नष्ट हो गए हों उन्हें तत्काल आरबीसी 6 (4) के तहत सहायता उपलब्ध कराएं। इसके अलावा उन्होंने रीवा के गुलाब नगर में जल भराव का निरीक्षण भी किया। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शिविरों में साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाए। जहां बाढ़ का पानी उतर गया है, वहां शासकीय अमले को भेजें, लोगों को खाने-पीने की किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। पीने के पानी की शुद्धता के लिए सभी जल स्रोतों एवं हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर इत्यादि से क्लोरिनेशन कराएं। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी गांव में और नगरी क्षेत्र के वार्डों में जहां बाढ़ का प्रकोप रहा है वहां विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करें।

महामारी फैलने से बचाएं


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुखार एवं सर्दी जुकाम के मरीज को भी गंभीरता से लिया जाए, किसी तरह की महामारी की स्थिति निर्मित ना हो। जिन गांवों में अति वर्षा से विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई हो, उसे तत्काल बहाल करें। पशु चिकित्सा विभाग को भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में जानवरों के इलाज में भेजें, किसी तरह की महामारी नहीं फैलनी चाहिए और यदि पशुओं की मृत्यु हुई हो तो उनका वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोजल करें। उन्होंने कहा कि गौशालाओं इत्यादि में पशुओं के खाने-पीने एवं चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें।

फील्ड में उतरें अधिकारी-कर्मचारी


मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि यदि फसल क्षति की सूचना हो तो वहां तत्काल सर्वे कराएं। यदि बुवाई वगैरा प्रारंभिक अवस्था में हो तो उसके नष्ट होने पर बीज इत्यादि की व्यवस्था करें। राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, कृषि विभाग इत्यादि के अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके कार्य स्थल-फील्ड में रहना सुनिश्चित करवाएं। इनके दल बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजें। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरी निकायों एवं गांव में साफ सफाई का एक विशेष अभियान प्रारंभ करें ताकि किसी तरह की बीमारी न फैले।

जनता का रखा जाएगा पूरा ध्यान


समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि आज रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग में अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित कर नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं एवं सहायता उपलब्ध कराई गई। बीते दो दिनों से वर्षा थमने के बाद अधिकांश नागरिक राहत शिविरों से अपने घरों को लौट चुके हैं। अतिवृष्टि के दौरान जिन नागरिकों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा जहां जनहानि एवं पशुहानि हुई है, उन्हें नियमानुसार सरकार की ओर से मुआवजा एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि 24 से 27 अगस्त 2026 के बीच जिन जिलों में वर्षा चक्र सक्रिय होने की संभावना है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने तथा आवश्यकता के अनुरूप राहत एवं बचाव की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, इस वर्ष प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 20% कम वर्षा हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को प्रोत्साहित करने तथा किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बदलती मौसम परिस्थितियों के बीच नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

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