जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल

‘वन नेशन-वन स्टाइपेंड’ पर डॉक्टरों की हड़ताल, इंदौर के MY अस्पताल में सेवाएं प्रभावित

इंदौर के जूनियर डॉक्टरों ने स्टाइपेंड में समानता और भोपाल में लाठीचार्ज के विरोध में हड़ताल शुरू की है। मरीजों की सेवा जारी रखने की कोशिश में अस्पताल प्रबंधन।

By : दिव्या मिस्त्री
‘वन नेशन-वन स्टाइपेंड’ पर डॉक्टरों की हड़ताल, इंदौर के MY अस्पताल में सेवाएं प्रभावित

इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों ने ‘वन नेशन-वन स्टाइपेंड’ की मांग और भोपाल में प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलन के चलते अस्पताल की व्यवस्थाओं पर असर पड़ा है और बड़ी संख्या में मरीज परेशान हो रहे हैं।

हाथों में तख्तियां लेकर डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन

अस्पताल परिसर में रेजिडेंट डॉक्टरों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की। डॉक्टरों का कहना है कि एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप करने वाले और पोस्ट ग्रेजुएशन के छात्र अस्पतालों में लंबे समय तक सेवाएं देते हैं, लेकिन अलग-अलग राज्यों में उन्हें मिलने वाले स्टाइपेंड में भारी अंतर है।

पूरे देश में समान स्टाइपेंड की मांग

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की प्रमुख मांग है कि पूरे देश में इंटर्न और जूनियर डॉक्टरों के लिए एक समान स्टाइपेंड व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि समान काम करने वाले डॉक्टरों को अलग-अलग राज्यों में अलग मानदेय मिलना उचित नहीं है।

भोपाल लाठीचार्ज का भी विरोध

इंदौर के डॉक्टर भोपाल में प्रदर्शन कर रहे चिकित्सकों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में भी आवाज उठा रहे हैं। जूडा इंदौर के अध्यक्ष डॉ. विक्रम नेतू ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। डॉक्टरों ने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

धूप में भी जारी रहेगा प्रदर्शन

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने कहा कि वे गर्मी और धूप के बावजूद आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। डॉक्टरों के मुताबिक सीनियर चिकित्सकों और उनके अन्य साथियों का भी उन्हें समर्थन मिल रहा है।

प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था का दावा किया

एमवाय अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों के इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। अस्पताल प्रबंधक डॉ. अशोक यादव के अनुसार ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं चालू हैं और वरिष्ठ डॉक्टरों व कंसल्टेंट्स को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मरीजों की सेवा भी, विरोध भी

कई रेजिडेंट डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर काम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि आंदोलन के बावजूद मरीजों की जान और इलाज से समझौता नहीं किया जाएगा। अब सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत से ही इस गतिरोध के खत्म होने की उम्मीद है।

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