डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं, इसलिए 30 के बाद नियमित हेल्थ चेकअप पर दें ध्यान उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं। 30 वर्ष की उम्र के बाद खानपान, शारीरिक गतिविधि, तनाव और नींद जैसी आदतों का असर मेटाबॉलिक और हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। खास बात यह है कि कुछ बीमारियां शुरुआत में कोई स्पष्ट संकेत नहीं देतीं, लेकिन धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित कर सकती हैं।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल ऐसी ही स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिन्हें अक्सर ‘साइलेंट’ बीमारियां कहा जाता है। इसलिए इस उम्र के बाद शरीर के जरूरी पैरामीटर पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
डायबिटीज का बढ़ सकता है खतरा
टाइप-2 डायबिटीज कई लोगों में लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती है। ब्लड शुगर बढ़ने के बावजूद व्यक्ति अपनी सामान्य दिनचर्या जारी रख सकता है और उसे समस्या का पता देर से चल सकता है।
30 वर्ष के बाद, खासकर जिन लोगों में जोखिम कारक मौजूद हैं, उनके लिए समय-समय पर ब्लड शुगर और HbA1c जैसी जांचों के बारे में डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
परिवार में डायबिटीज का इतिहास, अधिक वजन, पेट के आसपास जमा चर्बी, कम शारीरिक गतिविधि और असंतुलित खानपान जैसे कारक जोखिम बढ़ा सकते हैं।
हाई ब्लड प्रेशर को न करें नजरअंदाज
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट कंडीशन कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। सिरदर्द या चक्कर नहीं आ रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं कि ब्लड प्रेशर सामान्य ही है।
नियमित ब्लड प्रेशर जांच से ही इसकी स्थिति का पता लगाया जा सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी हो सकता है बिना लक्षण
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर आमतौर पर कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। इसका पता लिपिड प्रोफाइल जैसे ब्लड टेस्ट के जरिए लगाया जाता है।
अगर लंबे समय तक कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित न रहे, तो यह हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। इसलिए अपनी उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और अन्य जोखिम कारकों के अनुसार डॉक्टर से कोलेस्ट्रॉल की जांच के बारे में सलाह लेना बेहतर है।
वजन सामान्य है तो भी न हों बेफिक्र
कई लोगों को लगता है कि अगर वजन सामान्य है तो स्वास्थ्य भी ठीक होगा। लेकिन केवल वजन स्वास्थ्य का पूरा पैमाना नहीं है। कम शारीरिक गतिविधि, लंबे समय तक बैठे रहना, असंतुलित खानपान, खराब नींद और तनाव जैसी आदतें भी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। धूम्रपान और परिवार में डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर का इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए वजन के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और कमर के घेरे पर भी ध्यान देना जरूरी है।
30 के बाद इन आदतों को बनाएं दिनचर्या का हिस्सा
हर व्यक्ति की स्वास्थ्य जरूरत अलग होती है, लेकिन कुछ अच्छी आदतें लंबे समय तक सेहत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
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नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करें।
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संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
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पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
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धूम्रपान से दूरी बनाएं।
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तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।
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लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।
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अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार नियमित जांच कराएं।
ध्यान रखें: 30 की उम्र के बाद हर व्यक्ति को एक जैसे टेस्ट या एक जैसी जांच की जरूरत नहीं होती। परिवार का मेडिकल इतिहास, वजन, जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर से सलाह लेकर हेल्थ चेकअप कराना बेहतर है।