मध्य प्रदेश में सितंबर महीने में बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने वाला है। हड़ताल और साप्ताहिक अवकाश के चलते प्रदेश की करीब 7 हजार बैंक शाखाओं में कई दिनों तक कामकाज प्रभावित रहेगा। करीब 40 हजार बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इस दौरान ग्राहकों को कैश जमा-निकासी, चेक क्लियरेंस और अन्य सेवाओं में परेशानी हो सकती है।
11 सितंबर से शुरू होगा असर
बैंकिंग सेवाओं पर पहला असर 11 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल से पड़ेगा। इसके बाद 12 और 13 सितंबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी रहेगी। इस तरह लगातार तीन दिन बैंकिंग कामकाज प्रभावित होगा। इसके बाद 20 सितंबर को रविवार की छुट्टी रहेगी।
महीने के अंत में फिर 5 दिन संकट
सितंबर के आखिरी सप्ताह में भी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी। 26 और 27 सितंबर को शनिवार-रविवार की छुट्टी के बाद 28 से 30 सितंबर तक हड़ताल प्रस्तावित है। यानी महीने के दौरान दो अलग-अलग चरणों में बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ेगा।
कैश से लेकर चेक क्लियरेंस तक असर
हड़ताल के दौरान बैंक शाखाओं में कैश जमा और निकासी, चेक क्लियरेंस, KYC और लॉकर जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि ऑनलाइन बैंकिंग, UPI और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना है।
5-डे बैंकिंग वीक की मुख्य मांग
बैंक यूनियनों की प्रमुख मांग है कि बैंकों में हर शनिवार छुट्टी घोषित कर 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाए। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करने का प्रस्ताव दिया गया है।
PLI योजना वापस लेने की मांग
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने स्केल-IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू PLI योजना वापस लेने की भी मांग की है। यूनियनों का आरोप है कि यह योजना बैंक कर्मचारियों के बीच भेदभाव और असमानता को बढ़ावा देती है।
पेंशन और भर्ती के मुद्दे भी लंबित
यूनियनों के मुताबिक पेंशन अपडेशन, पेंशनभोगियों के एक्स-ग्रेशिया की समीक्षा, NPS को OPS में बदलने और पर्याप्त क्लर्क, सब-स्टाफ व आर्म्ड गार्ड्स की भर्ती जैसी मांगें भी अभी लंबित हैं।
सरकार से बातचीत पर टिकी हड़ताल
सरकार और बैंक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक प्रस्तावित है। यूनियनों का कहना है कि अगर बातचीत में सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है तो हड़ताल का फैसला जारी रहेगा। ऐसे में सितंबर में बैंक ग्राहकों को पहले से जरूरी बैंकिंग काम निपटाने की सलाह दी जा रही है।