इंदौर के कुमेड़ी स्थित अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) से सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ यह अत्याधुनिक बस टर्मिनल पिछले करीब दो साल से बसों के नियमित संचालन का इंतजार कर रहा है। इसी बीच टर्मिनल परिसर में भंडारे का आयोजन किए जाने की तस्वीरें सामने आई हैं।
टर्मिनल के अंदर चढ़ीं भट्टियां
जानकारी के मुताबिक, भंडारे के दौरान ISBT के मुख्य टर्मिनल के अंदर ही हलवाइयों ने भट्टियां लगाईं और बड़ी मात्रा में पूरियां तली गईं। यात्रियों के बैठने के लिए बनाई गई सीटों पर लोग प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सरकारी संपत्ति के इस तरह इस्तेमाल को लेकर अब व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
जनप्रतिनिधि भी शामिल
मामले की तस्वीरों और जानकारी सामने आने के बाद यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधि और पार्षद भी मौजूद रहे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े सरकारी परिसर में आयोजन की अनुमति किस स्तर से दी गई और इसकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।
IDA बोला- ‘हमें आयोजन की जानकारी नहीं’
मामला सामने आने के बाद इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के अधिकारियों ने आयोजन की जानकारी होने से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस तरह के किसी आयोजन की जानकारी या अनुमति से जुड़ी फाइल के बारे में पता नहीं है। अब मामले की जांच कराने की बात कही जा रही है।
करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार ISBT में बसों का संचालन शुरू होने का इंतजार पहले से ही चर्चा में रहा है। ऐसे में बंद पड़े टर्मिनल परिसर में भंडारे का आयोजन सामने आने के बाद सरकारी संपत्ति के उपयोग और प्रशासनिक निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आयोजन की अनुमति किसने दी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।