देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में आयोजित किया गया। समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने सफल प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र और पदक प्रदान किए।
विकसित भारत के लक्ष्य में निभाएंगे भूमिका
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने नए वन अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें देश की प्रतिष्ठित अकादमी से तकनीकी ज्ञान और नेतृत्व क्षमता का प्रशिक्षण मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये अधिकारी अपने सेवाकाल के दौरान भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब इन अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होगी।
जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता बड़ी चुनौती
भूपेंद्र यादव ने कहा कि आने वाले समय में वन अधिकारियों के सामने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी और मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर चुनौतियां होंगी। इन समस्याओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी को साथ लेकर चलना होगा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यावहारिक समाधान तैयार करने में किया जाना चाहिए।
अच्छा अधिकारी बनने के लिए अच्छा इंसान जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि एक बेहतर प्रशासक बनने के लिए सबसे पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है। उन्होंने आत्ममूल्यांकन और लगातार सीखने की आदत को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी समाज और राष्ट्र की सेवा में संवेदनशीलता के साथ काम करें और अपने अनुभवों से लगातार बेहतर प्रदर्शन करें।
1938 से देश की सेवा कर रही अकादमी
आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने बताया कि यह संस्थान वर्ष 1938 से वन अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहा है। अब तक भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों को यहां प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रशिक्षण में तकनीक और क्षेत्रीय अभ्यास पर जोर
अकादमी में प्रशिक्षुओं को वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, आधुनिक तकनीक और नेतृत्व विकास का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा देश के अलग-अलग पारिस्थितिक क्षेत्रों में क्षेत्रीय अभ्यास, अध्ययन भ्रमण और साहसिक गतिविधियों पर आधारित रहा। समारोह में राजस्थान कैडर की प्रतीक्षा नानासाहेब काले को बैच टॉपर घोषित किया गया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।