हाईकोर्ट याचिका खारिज

प्रताप बाजवा की याचिका खारिज, गुरइकबाल माहल बोले- सच्चाई की जीत, अब मानहानि केस की तैयारी

गुरदासपुर में गुरइकबाल सिंह माहल ने घोषणा की कि हाईकोर्ट ने प्रताप सिंह बाजवा की याचिका खारिज कर दी है, यह चुनावी प्रक्रिया की विजय है।

प्रताप बाजवा की याचिका खारिज, गुरइकबाल माहल बोले- सच्चाई की जीत, अब मानहानि केस की तैयारी

गुरदासपुर में कादियां विधानसभा क्षेत्र के इंचार्ज गुरइकबाल सिंह माहल ने कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा की हाईकोर्ट याचिका खारिज होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया दी। माहल ने दावा किया कि कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि चुनाव प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं हुई थी और अब सच्चाई की जीत हुई है।

नगर परिषद चुनाव को लेकर था विवाद

मामला कादियां नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव से जुड़ा हुआ है। गुरइकबाल सिंह माहल ने बताया कि 16 तारीख को हुए चुनाव पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ संपन्न हुए थे। उन्होंने कहा कि कुल 9 सदस्यों में से 8 सदस्यों ने मतदान किया, जिसमें कुलविंदर कौर को अध्यक्ष और नीता को उपाध्यक्ष चुना गया।

विपक्ष पर लगाए बेबुनियाद आरोपों के आरोप

माहल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद जानबूझकर विवाद खड़ा किया गया और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों में कोई ठोस आधार नहीं था और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी।

हाईकोर्ट में नहीं साबित हुई गड़बड़ी

माहल के अनुसार, चुनाव को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन सुनवाई के दौरान चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता साबित नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कोर्ट में विपक्ष अपने आरोपों को साबित करने में असफल रहा, जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई।

बाजवा के खिलाफ मानहानि केस की तैयारी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुरइकबाल सिंह माहल ने प्रताप सिंह बाजवा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजवा और उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए आरोपों से उनकी और उनके परिवार की छवि को नुकसान पहुंचा है। माहल ने ऐलान किया कि वह जल्द ही प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे और इसके लिए जरूरी दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं।

राजनीतिक टकराव बढ़ने के संकेत

इस पूरे मामले के बाद पंजाब की राजनीति में बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। जहां माहल इसे अपनी जीत बता रहे हैं, वहीं विपक्ष की ओर से आगे की रणनीति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में रह सकता है।

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