हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के समापन के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार के खिलाफ विरोध करने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन विरोध के दौरान विधानसभा की मर्यादा, नियमों और परंपराओं का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने 27 अगस्त को विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले हुई घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की मर्यादा का उल्लंघन करते हुए सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्कामुक्की की। सैनी ने कहा कि विधानसभा और उसके सदस्यों की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार चिंता और खेद का विषय है।
सत्र की शुरुआत में दिवंगतों को दी गई श्रद्धांजलि
नायब सैनी ने कहा कि मानसून सत्र की शुरुआत दिवंगत पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके अलावा रोहतक अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों और जहरीली गैस की घटना में मृतकों को भी सदन में श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दुखद घटनाओं ने सभी को व्यथित किया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील अवसरों के बीच विधानसभा की कार्यवाही और सदन की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
‘विपक्ष को विरोध का अधिकार, लेकिन मर्यादा भी जरूरी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार के फैसलों का विरोध करना और अपनी बात सदन में रखना विपक्ष का अधिकार है। हालांकि, इस अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।
सैनी के मुताबिक, विरोध के नाम पर नियम तोड़ना, सुरक्षा कर्मियों के साथ धक्कामुक्की करना या जबरन आगे बढ़ने का प्रयास करना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विधानसभा की अपनी गरिमा, परंपराएं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियम हैं और सभी सदस्यों से उनका पालन अपेक्षित है।
‘विधायक होने का मतलब कानून से ऊपर होना नहीं’
मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर में नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रवेश करने के नियम का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सदन में ऐसी तख्तियां लेकर प्रवेश नहीं करने का नियम पहले से निर्धारित है और सभी विधायकों को इसका पालन करना चाहिए।
नायब सैनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायक चुने जाने का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति नियम और कानून से ऊपर हो जाता है। उनके अनुसार, विधानसभा के नियम सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं और इन्हें सामूहिक रूप से बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सदन की गरिमा और निर्धारित नियमों का भी सम्मान करें।