मध्यप्रदेश के संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए ग्वालियर हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सातवें वेतनमान में ग्रेड पे और समकक्षता से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। इससे संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों के 2400 रुपये ग्रेड पे के आधार पर वेतन निर्धारण का दावा मजबूत हुआ है। संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ का दावा है कि इस फैसले का लाभ प्रदेश के अलग-अलग विभागों में कार्यरत करीब 50 हजार डाटा एंट्री ऑपरेटरों को मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ और प्रशासनिक स्तर पर इसके क्रियान्वयन की स्थिति सरकार की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
सातवें वेतनमान में ग्रेड पे को लेकर था विवाद
डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने ग्रेड पे में कमी को लेकर पहले शासन स्तर पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। जब वहां से समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारियों ने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ का रुख किया। याचिका में कर्मचारियों की ओर से दलील दी गई कि नियुक्ति के समय से उन्हें यूडीसी के समान वेतनमान दिया जाता रहा है। चौथे, पांचवें और छठवें वेतनमान में भी इसी आधार पर वेतन मिलता रहा। ऐसे में सातवें वेतनमान में समकक्षता निर्धारित करते समय ग्रेड पे को 1900 रुपये करना उचित नहीं है। कर्मचारियों ने 2400 रुपये ग्रेड पे के आधार पर वेतन निर्धारण की मांग की थी।
सिंगल बेंच के फैसले को सरकार ने दी थी चुनौती
मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने डाटा एंट्री ऑपरेटरों के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 1900 रुपये ग्रेड पे के आधार पर लेवल-4 में की गई समकक्षता को निरस्त करते हुए 2400 रुपये ग्रेड पे के अनुसार वेतन निर्धारित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डबल बेंच में रिट अपील दाखिल की। अब डबल बेंच ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जी.एस. आहुलुवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने की।
महासंघ ने फैसले को बताया बड़ी राहत
मध्यप्रदेश संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने हाईकोर्ट के फैसले को संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों के लिए बड़ी राहत बताया है। महासंघ का दावा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अलावा दूसरे सरकारी विभागों में काम कर रहे करीब 50 हजार संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों को भी इसका लाभ मिल सकता है। महासंघ ने सरकार के सामने संविदा कर्मचारियों के दूसरे पदों के वेतनमान में कथित विसंगतियों का मुद्दा भी उठाया है। महासंघ के अनुसार कुछ पदों के ग्रेड पे में भी कमी की गई है, जिनमें लेखापाल, एमआईएस कोऑर्डिनेटर, विकासखंड समन्वयक, महिला जेंडर समन्वयक और सहायक यंत्री शामिल हैं।
दूसरी वेतन विसंगतियों की समीक्षा की मांग
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग से 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के तहत वेतनमान की विसंगतियों की समीक्षा के लिए बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि समकक्षता निर्धारण में जिन पदों के वेतनमान में अंतर आया है, उनका भी निराकरण किया जाना चाहिए। महासंघ का दावा है कि इन विसंगतियों को लेकर कई मामले अदालतों में लंबित हैं। इससे सरकार का समय और धन दोनों खर्च हो रहे हैं। महासंघ चाहता है कि अदालतों में चल रहे विवादों को कम करने के लिए शासन स्तर पर सभी मामलों की समीक्षा कर समाधान निकाला जाए।
अब शासन के अगले कदम पर नजर
ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच द्वारा राज्य सरकार की अपील खारिज किए जाने के बाद संविदा डाटा एंट्री ऑपरेटरों में राहत का माहौल है। 2400 रुपये ग्रेड पे के आधार पर वेतन निर्धारण का रास्ता कानूनी रूप से मजबूत हुआ है। हालांकि, प्रदेशभर में इसका वास्तविक लाभ किस तरह और कब लागू होगा, यह शासन स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई से स्पष्ट होगा। फिलहाल कर्मचारियों और महासंघ की नजर सरकार के अगले आदेश पर है। यदि शासन इस फैसले के अनुरूप आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करता है, तो हजारों संविदा कर्मचारियों के वेतन और समकक्षता से जुड़े विवाद का समाधान हो सकता है।