झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता भानु प्रताप शाही ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। रांची में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री चाहे उन्हें कमरे में बंद करके "मोटे बांस से भी पीटें", तब भी वे हेमंत सोरेन और JMM का साथ नहीं छोड़ेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता में बने रहने और राजनीतिक लाभ के लिए गठबंधन से अलग होने को तैयार नहीं है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता भानु प्रताप शाही
'झारखंड कांग्रेस के लिए एटीएम कार्ड बन गया है'
भानु प्रताप शाही ने दावा किया कि देश के अधिकांश राज्यों में कांग्रेस का जनाधार कमजोर हो चुका है और झारखंड ही ऐसा राज्य है, जहां पार्टी अभी भी सत्ता में हिस्सेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के लिए झारखंड "एटीएम कार्ड" की तरह बन गया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को विचारधारा से कोई सरोकार नहीं है। उनका आरोप था कि चाहे उन पर कितनी भी राजनीतिक या अन्य प्रकार की चोट पहुंचे, सत्ता में बने रहने और लाभ लेने के लिए वे JMM का साथ नहीं छोड़ेंगे।
मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर जताई अटकलें
भाजपा नेता ने हालिया राज्यसभा चुनाव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बावजूद पार्टी के नेताओं के बयान विरोधाभासी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व सार्वजनिक रूप से अपनी हार को स्वीकार करने के बजाय अलग-अलग तरह के बयान दे रहा है।
इसी दौरान उन्होंने राज्य सरकार में संभावित मंत्रिमंडलीय फेरबदल को लेकर भी अटकलें जताईं। शाही ने दावा किया कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के मंत्रिमंडल से बाहर होने की संभावना अधिक है। साथ ही उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के मंत्री पद पर भी खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने कोई आधिकारिक आधार या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
RIMS-2 परियोजना पर भी सरकार को घेरा
भानु प्रताप शाही ने स्पष्ट किया कि भाजपा RIMS-2 परियोजना के निर्माण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल उस प्रस्तावित भूमि का विरोध कर रही है, जिसे किसानों और आदिवासियों की जमीन बताया जा रहा है।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा का चुनावी चिन्ह
उन्होंने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन भी इस भूमि पर काम शुरू करने का प्रयास कर चुके थे, लेकिन वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। शाही ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार भी उसी विवादित जमीन पर परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
'पहले RIMS-1 की व्यवस्था सुधारे सरकार'
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान में RIMS में ही पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं। उनका सुझाव था कि रांची के सदर अस्पताल की बहुमंजिला इमारत का बेहतर उपयोग करते हुए ऑर्थोपेडिक और न्यूरो विभागों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है।
उन्होंने दावा किया कि सदर अस्पताल की कई मंजिलें अभी भी पूरी तरह उपयोग में नहीं हैं। शाही ने आरोप लगाया कि RIMS-2 परियोजना अगले 10 से 15 वर्षों में भी पूरी होने की संभावना नहीं है। उनके अनुसार, परियोजना केवल बजट आवंटन और ठेके की प्रक्रिया तक सीमित रह सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।