बरसाना में लठामार होली का रंग, नंदगांव के हुरियारों पर बरसी प्रेम की लाठियां

barsana-lathmar-holi-nandgaon-huriyare-2026

बरसाना में लठामार होली का रंग, नंदगांव के हुरियारों पर बरसी प्रेम की लाठियां

बरसाना में लठामार होली का रंग नंदगांव के हुरियारों पर बरसी प्रेम की लाठियां

barsana lathmar holi: राधा-रानी की नगरी बरसाना में रंग, भक्ति और परंपरा के अद्भुत संगम में पूरी तरह डूबी दिखी। शाम होते-होते यहां विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का नजारा ऐसा था कि छतों से लेकर गलियों तक अबीर-गुलाल उड़ता रहा। नंदगांव से आए हुरियारों पर बरसाने की हुरियारिनों ने प्रेम की लाठियां बरसाईं और हर ओर राधा-कृष्ण के जयकारे गूंजते रहे.यह नजारा सिर्फ देखने का नहीं था, महसूस करने का था, ऐसा जो बरसाना पहुंचे बिना पूरा नहीं होता।

[caption id="attachment_137242" align="alignnone" width="1061"]बरसाने की होली बरसाने की होली[/caption]

barsana lathmar holi: रंगीली गली से लाड़ली जी मंदिर तक उत्सव

योगी सरकार ने इस बार रंगोत्सव 2026 को खास रूप देते हुए आयोजन को और भव्य बनाया। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु इस अनूठी होली के साक्षी बने. नंदगांव के हुरियारों के बरसाना पहुंचते ही प्रिया कुंड पर उनका आत्मीय स्वागत हुआ। बरसाना वासी उन्हें कृष्ण के सखा और दामाद की तरह देखते हैं, इसलिए मिठाई, पकोड़े, ठंडाई और भांग से खातिरदारी की गई.इसके बाद हुरियारों ने पाग बांधी और ब्रह्मांचल पर्वत स्थित श्री लाडली किशोरी जी मंदिर पहुंचकर राधा रानी से होली खेलने की अनुमति ली। इसी दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा हुई, जिसने पूरे माहौल को और दिव्य बना दिया।

barsana lathmar holi: ढोल-नगाड़ों की थाप पर ब्रज रसिया

दर्शन के बाद शाम करीब चार बजे हुरियारे रंगीली गली पहुंचे। यहां ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक ब्रज रसिया और होली गीत गाए गए। हुरियारों की टोलियों ने गीतों के जरिए हुरियारिनों को रिझाने की कोशिश की और फिर वही पल आया, जब प्रेम की लाठियां बरसने लगीं.गुलाल से सनी गलियों में कदम रखना भी मुश्किल था, लेकिन श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान नहीं, सिर्फ आनंद दिख रहा था।

Also Read-केरल के बाद दिल्ली का नाम बदलने की उठी मांग, सांसद ने अमित शाह को लिखा पत्र

पांच हजार साल पुरानी परंपरा

मान्यता है कि यह परंपरा करीब 5000 साल पुरानी है। कथा के अनुसार भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी और उनकी सखियों को चिढ़ाने बरसाना आए थे। तब सखियों ने लाठियां उठाकर उन्हें खदेड़ा था, और वही लीला आज परंपरा बन चुकी है.ब्रज क्षेत्र में होली बसंत पंचमी से शुरू होकर करीब 45 दिन तक चलती है, लेकिन इसका सबसे बड़ा और खास आकर्षण यही लठामार होली मानी जाती है।

लाठियों में भी झलकता है प्रेम

श्रद्धालु भारती ने कहा, “मैंने जीवन में पहली बार ऐसी होली देखी। लाठियों की मार में भी जो प्रेम और भक्ति का भाव है, वो सिर्फ ब्रज में ही महसूस किया जा सकता है। ऐसा लग रहा था जैसे साक्षात कान्हा सामने होली खेल रहे हों.वहीं श्रद्धालु स्वाति ने कहा कि प्रशासन की व्यवस्थाएं काबिल-ए-तारीफ रहीं। “इतनी भीड़ के बावजूद हर चीज सुचारु रही। जब आसमान से फूल बरसे, तो मन अपने आप भर आया.बरसाना की यह होली हर साल यही याद दिलाती है कि यहां रंग सिर्फ गुलाल के नहीं होते, परंपरा और प्रेम के भी होते हैं।

 

संबंधित सामग्री

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर-: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य

ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक अवसर-: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल में आयोजित ब्रिक्स संस्कृति सम्मेलन का समापन हुआ, जिसमें 'भोपाल घोषणा पत्र' को अपनाया गया। इससे सांस्कृतिक सहयोग और विरासत संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को चार नई हवाई सेवाओं का करेंगे शुभारंभ

राज्य

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को चार नई हवाई सेवाओं का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में चार नई हवाई सेवाओं का शुभारंभ किया, जिससे प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

पिता के पास ही दफन हुआ अबान, तीनों भाइयों ने मिलकर दिया कंधा

राज्य

पिता के पास ही दफन हुआ अबान, तीनों भाइयों ने मिलकर दिया कंधा

अतीक अहमद के बेटे अबान का अंतिम संस्कार प्रयागराज में हुआ। अंतिम संस्कार में भारी भीड़ और कड़ी सुरक्षा देखने को मिली।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को दुबई में होने वाली एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग का आमंत्रण

राज्य

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को दुबई में होने वाली एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग का आमंत्रण

दुबई ग्लोबल फाउंडेशन के प्रेसिडेंट ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को सितंबर 2026 में होने वाली निवेश मीटिंग का निमंत्रण दिया।

बाबा अमरनाथ की यात्रा पर रोक, बारिश के कारण रास्ता हुआ खराब

देश-विदेश

बाबा अमरनाथ की यात्रा पर रोक, बारिश के कारण रास्ता हुआ खराब

बाबा अमरनाथ की यात्रा खराब मौसम और लैंडस्लाइड के कारण 20 दिन पहले बंद कर दी गई। 4.8 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा पूरी की।