बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु एस.के. जैन का इस्तीफा मंजूर,राज्यपाल ने तत्का...

बदलाव बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु एस.के. जैन का इस्तीफा मंजूर,राज्यपाल ने तत्काल प्रभाव से किया स्वीकार

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. एस.के. जैन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया गया। विवादों के बीच, अंतरिम प्रशासन संभालेगा विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां।

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु एसके जैन का इस्तीफा मंजूरराज्यपाल ने तत्काल प्रभाव से किया स्वीकार

राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर एस.के. जैन का इस्तीफा राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। इस संबंध में राजभवन की ओर से आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। कुलगुरु के पद से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद विश्वविद्यालय के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत संभाली जाएगी।

तत्काल प्रभाव से मंजूरी प्रदान कर दी

जानकारी के अनुसार प्रो. एस.के. जैन ने 18 जून को अपना त्यागपत्र सौंपा था। इसके बाद राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल ने उनके इस्तीफे पर विचार करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से मंजूरी प्रदान कर दी। आदेश के मुताबिक नए स्थायी कुलगुरु की नियुक्ति होने तक विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी प्रोफेसर विवेक शर्मा को सौंपी गई है। उन्हें कुलगुरु का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है और वे विश्वविद्यालय के सभी प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों का संचालन करेंगे।

उनके खिलाफ आंदोलन भी चलाया था

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रो. एस.के. जैन को लेकर विवाद और विरोध का माहौल बना हुआ था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा उनके खिलाफ कई बार प्रदर्शन किए गए थे। छात्र संगठन ने विश्वविद्यालय के विभिन्न मुद्दों को लेकर कुलगुरु के कार्यकाल पर सवाल उठाए थे और उनके खिलाफ आंदोलन भी चलाया था।

अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई

ऐसे में प्रो. जैन का इस्तीफा और उसका तत्काल स्वीकार किया जाना विश्वविद्यालय के हालिया घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

फिलहाल बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में नई नियुक्ति तक अंतरिम प्रशासनिक व्यवस्था लागू रहेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विश्वविद्यालय को नया स्थायी कुलगुरु कब मिलता है और आने वाले समय में संस्थान की प्रशासनिक दिशा किस प्रकार तय होती है. 

 

 

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