स्कूल बस ने मां के सामने मासूम बच्चे को कुचला फिर डस्टपैन से समेटा ,मंजर देख रोती रही माँ

बच्चे की स्कूल बस से मौत

स्कूल बस ने मां के सामने मासूम बच्चे को कुचला फिर डस्टपैन से समेटा ,मंजर देख रोती रही माँ

एक स्कूल बस ने 3 वर्षीय बच्चे को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद ड्राइवर भाग गया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया।

स्कूल बस ने मां के सामने मासूम बच्चे को कुचला फिर डस्टपैन से समेटा मंजर देख रोती रही माँ 

स्कूल बस ने मां के सामने मासूम बच्चे को कुचला फिर डस्टपैन से समेटा ,मंजर देख रोती रही माँ 

वो मंजर क्या होगा जब एक माँ अपने मासूम बेटे को अपनी ही आँखों इस दुनिया से अलविदा होते देखे ऐसा ही दिल को रोने पर मजबूर करने वाली घटना सामने आई जहाँ बुधवार सुबह 3 साल के बच्चे को प्राइवेट स्कूल की बस ने कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बच्चा अपनी मां के साथ बड़ी बहन को स्कूल बस में बैठाने घर के बाहर आया था। बता दे हादसे के बाद ड्राइवर बस लेकर भागने लगा, लेकिन ग्रामीणों ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। बताया जा रहा कि ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हादसा लुधियाना कोहाड़ा क्षेत्र के गांव शालू भैणी में हुआ। बच्चे की एक बहन है।

कैसे हुई पूरी घटना 

बुधवार सुबह करीब 7 बजे अमनदीप अपनी बेटी रमनदीप कौर को स्कूल बस में बैठाने के लिए घर के बाहर गई थी। उनके साथ बेटा समरदीप भी था। इसी दौरान स्कूल बस पहुंची। जिसके बाद अमनदीप बेटी को बस में चढ़ाने लगीं, जबकि समरदीप बस के आगे की ओर चला गया। और बेटी के बस में बैठते ही ड्राइवर ने बस आगे बढ़ा दी। ड्राइवर को बस के आगे खड़ा मासूम दिखाई नहीं दिया और बस उसके ऊपर से गुजर गई। जिसके बाद उसकी मौत हो गई 

बस के दोनों टायर बच्चे के ऊपर से गुजरे

मां अमनदीप के मुताबिक पहले बस का अगला टायर और फिर पीछे का टायर भी मासूम के ऊपर से गुजर गया। हादसा इतना भयावह था कि परिवार के सामने ही बच्चे ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटना के बाद ड्राइवर बस रोकने की बजाय मौके से भागने लगा। लोगों ने आवाज लगाई, लेकिन वह नहीं रुका।

पीछा कर ड्राइवर को पकड़ा

हादसे के बाद ग्रामीणों और राहगीरों ने अपने वाहनों से बस का पीछा किया। कुछ दूरी पर नजदीकी गांव के पास ड्राइवर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पकड़े जाने के बाद ड्राइवर ने कहा कि हादसे में उसकी कोई गलती नहीं है। इस बात से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे भीड़ से छुड़ाकर हिरासत में ले लिया। 

मृतक के चाचा रशपिंदर सिंह ने कहा 

बस में बच्चों को चढ़ाने और उतारने के लिए कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था। बस चला रहा युवक करीब 19 साल का है। हादसे के बाद जब ड्राइवर से लाइसेंस दिखाने को कहा गया तो उसने बताया कि उसके पास लाइसेंस नहीं है और उसकी फोटो मोबाइल में है। हालांकि, उसका फोन टूटा होने के कारण वह फोटो नहीं दिखा सका।और बहाना बनाता रहा 

स्कूल बस की हालत भी ठीक नहीं थी

रशपिंदर सिंह ने कहा कि कंडियाना कलां स्थित यह स्कूल नौवीं कक्षा तक है और इसकी बस की हालत भी ठीक नहीं थी। उन्होंने मांग की कि सभी स्कूल बसों की जांच कर सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

हादसे के बाद ग्रामीणों ने कहा

यदि ड्राइवर सावधानी से बस चलाता या हादसे के तुरंत बाद रुककर मदद करता तो स्थिति अलग हो सकती थी। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि ड्राइर की नियुक्ति किस आधार पर की गई और क्या उसके पास जरूरी दस्तावेज मौजूद थे।

नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी

ग्रामीणों ने कहा कि कि स्कूल बस हरियाणा नंबर की है। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार यह बस यहां संचालित नहीं होनी चाहिए। पीछे की ओर नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी।

जांच के बाद होगी कानूनी कार्रवाई

थाना कुमकलां के हेड कॉन्स्टेबल जगतार सिंह ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस नहीं मिला या किसी प्रकार की लापरवाही साबित हुई तो उसके अनुसार संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। बच्चे के शव को सिविल अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया है

सुरक्षा नियमों की कई स्तर पर अनदेखी हुई

ट्रैफिक एक्सपर्ट अजय शर्मा ने कहा कि बाहरी राज्य की नंबर प्लेट लगाकर स्कूल बस शहर में चल नहीं सकती। यह सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी का उल्लंघन है। बच्चों की सुरक्षा के लिए ये सबसे बड़ा खतरा है। इसके लिए ट्रांसपोर्ट विभाग, ट्रैफिक पुलिस और स्कूल प्रशासन तीनों बराबर के जिम्मेदार हैं। इनके खिलाफ बच्चों की सुरक्षा खतरे में डालने के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए, क्योंकि यह अपनी ड्यूटी इमानदारी से नहीं कर रहे। आज भी जो एक्सीडेंट में बच्चे की जान गई है उस बस पर सबसे पहले हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं है। स्कूल परमिट नहीं है। बस फिटनेस नहीं है। अटेंडेट ना होना बड़ी लापरवाही है। बस का जो नंबर लिखा है वह भी क्लियर नहीं 

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