विज्ञापन जगत का सितारा: पीयूष पांडे
पीयूष पांडे भारतीय विज्ञापन इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित चेहरे थे। उन्हें “हर खुशी में रंग लाए”, “फेविकोल” और “कुछ खास है” जैसे अभियानों के लिए याद किया जाएगा। उनकी क्रिएटिविटी, मुस्कान और कथाकार शैली ने भारतीय विज्ञापन को एक नई दिशा दी।
निधन की खबर और शोक संदेश...
पीयूष पांडे के निधन की जानकारी स्तंभकार सुहेल सेठ ने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर दी। उन्होंने लिखा- "मेरे सबसे प्यारे दोस्त पीयूष पांडे जैसे प्रतिभाशाली व्यक्ति के निधन से मैं बेहद दुखी और स्तब्ध हूं। भारत ने एक महान विज्ञापन हस्ती नहीं, बल्कि एक सच्चे देशभक्त और बेहतरीन सज्जन को खो दिया है।" केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी शोक व्यक्त किया और लिखा कि पांडे की रचनात्मक प्रतिभा ने कहानी कहने की कला को नई परिभाषा दी।Truly at a loss for words to express my sadness at the demise of Padma Shri Piyush Pandey.
A phenomenon in the world of advertising, his creative genius redefined storytelling, giving us unforgettable and timeless narratives. To me, he was a friend whose brilliance shone… pic.twitter.com/t6ZDSViCrS — Piyush Goyal (@PiyushGoyal) October 24, 2025करियर की शुरुआत और योगदान...
पीयूष पांडे ने 1982 में ओगिल्वी एंड माथर इंडिया (अब ओगिल्वी इंडिया) से अपने विज्ञापन करियर की शुरुआत की। प्रशिक्षु खाता कार्यकारी के रूप में शुरू करने के बाद, उन्होंने रचनात्मक क्षेत्र में कदम रखा और भारतीय विज्ञापन की दिशा बदल दी।यादगार विज्ञापन और क्रिएटिव कैम्पेन...
उन्होंने कई प्रतिष्ठित विज्ञापन अभियानों की रचना की: 1. फेविकोल की एग फिल्म – चिपकने वाले उत्पाद का नया अंदाज। 2. एशियन पेंट्स का ‘हर खुशी में रंग लाए’। 3. कैडबरी का ‘कुछ खास है’। साथ ही, उन्होंने लंबे समय तक भारत की विविधता में एकता दिखाने वाले गीत ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ की रचना भी की।राजनीति और प्रचार में योगदान...
पीयूष पांडे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान का हिस्सा रहे। उन्होंने “अबकी बार मोदी सरकार” जैसे नारे का निर्माण किया, जो जनता के बीच काफी चर्चित रहा।