Ashta Kali Mata Mandir Seoni: आष्टा माता मंदिर जो आज भी है अधूरा, भोजेश्वर महादेव जैसा है रहस्य!

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Ashta Kali Mata Mandir Seoni: आष्टा माता मंदिर जो आज भी है अधूरा, भोजेश्वर महादेव जैसा है रहस्य!

ashta kali mata mandir seoni आष्टा माता मंदिर जो आज भी है अधूरा भोजेश्वर महादेव जैसा है रहस्य

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एक ही रात में हुआ था मंदिर का निर्माण....

स्थानीय मान्यता के अनुसार, 13वीं शताब्दी में मां काली के आशीर्वाद से यह मंदिर रातभर में बन रहा था। बड़े-बड़े पत्थरों की शिलाओं से मंदिर का ढांचा तैयार हो रहा था, लेकिन जैसे ही मुर्गे की बांग सुनाई दी और लोगों ने निर्माण कार्य देख लिया, काम उसी समय रुक गया।

 

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आज भी मंदिर परिसर के आसपास उन विशाल शिलाओं को देखा जा सकता है, जिनसे निर्माण कार्य अधूरा रह गया था।

इतिहासकारों की मानें तो यदुवंशी राजाओं ने कराया था निर्माण...

इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर 13वीं सदी में देवगिरी के यदुवंशी राजा रामचंद्र और उनके मंत्री हिमाद्री ने निर्मित कराया गया था। उस समय विदर्भ क्षेत्र तक यादव राजाओं का शासन फैला हुआ था। बताया जाता है कि हिमाद्री ने वास्तुकला की अनोखी शैली में 100 से अधिक मंदिरों का निर्माण करवाया था, जिनमें से 8 मंदिर इसी गांव में बने। यही वजह है कि इस स्थान का नाम “आष्टा” पड़ा, जिसका अर्थ होता है — आठ मंदिरों का स्थान।

नवरात्र में उमड़ता है भक्तों का सैलाब...

मां काली का यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां साल में दोनों नवरात्रि पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। श्रद्धालु दीप प्रज्वलित करते हैं, कलश स्थापना करते हैं और पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाते हैं। मां के दरबार में दो मंदिर और एक मंडप मौजूद है। गर्भगृह में प्रतिमा नहीं है, बल्कि मंदिर की पिछली दीवार से जुड़ी उत्तरमुखी काली माता की पाषाण मूर्ति स्थापित है। मंदिर की दीवारें चौकोर पत्थरों की जुड़ाई से बनी हैं, जिन्हें लोहे और शीशे की छड़ों से जोड़ा गया है ताकि संरचना संतुलित रहे।

मूर्ति स्थापना है वर्जित...

आष्टा गांव में एक अनोखी परंपरा आज भी निभाई जाती है — यहां नवरात्रि में किसी भी स्थान पर नई मूर्ति की स्थापना नहीं की जाती। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, कई वर्ष पहले यहां मूर्ति स्थापना का प्रयास किया गया था, लेकिन मूर्ति खंडित हो गई और उसके बाद कुछ अजीब घटनाएं घटीं। तभी से इस गांव में यह नियम बना दिया गया कि नवरात्रि में कोई नई मूर्ति स्थापित नहीं की जाएगी।

आस्था और रहस्य का संगम....

सिवनी का यह आष्टा काली मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और रहस्य का संगम है। जैसे भोजपुर का भोजेश्वर महादेव मंदिर अपने अधूरे निर्माण और रहस्यमय इतिहास के लिए प्रसिद्ध है, वैसे ही आष्टा माता मंदिर भी अपनी रातोंरात बनी संरचना और रुके हुए निर्माण की कथा के कारण लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।    

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