मध्यप्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों के बाद अब सरकार हरकत में आ गई है। राज्य के अभ्यारण्यों में बाघों की सुरक्षा के लिए एक नई पहल के तहत ‘जंगल कमांडो’ तैनात किए जा रहे हैं। वन विभाग ने विशेष टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स (TPF) का गठन किया है, जिसकी शुरुआत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से की गई है। इस फोर्स के जवानों को आधुनिक तकनीक और पुलिस स्तर की ट्रेनिंग दी जा रही है।
सरकार का नया सुरक्षा मॉडल
वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज की गई, जो चिंता का विषय है। वहीं 2026 के शुरुआती महीनों में ही 18 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है।इन मौतों के पीछे अवैध शिकार, जहर देना, करंट लगाना और जंगलों का सीमित होता क्षेत्र प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। हाल ही में सतपुड़ा और कान्हा टाइगर रिजर्व में हुई घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।
Read More:-
तीन राज्यों की 296 सीटों पर वोटिंग जारी: सीएम पिनाराई और मोहनलाल ने डाला वोट
‘जंगल कमांडो’ को मिलेगी हाईटेक ट्रेनिंग
नई टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के लिए 24 युवाओं का चयन किया गया है, जिन्हें पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पचमढ़ी में प्रशिक्षित किया जा रहा है।अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह के अनुसार, यह एक कस्टमाइज्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जिसे विशेष रूप से वन सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है।
इस प्रशिक्षण में शामिल हैं
- ड्रोन और साइबर इंटेलिजेंस का उपयोग
- हथियार संचालन और फील्ड ऑपरेशन
- अपराध जांच और इंटेलिजेंस कलेक्शन
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की जानकारी
- मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रियाएं
शिकारियों पर सख्ती
वन विभाग का मानना है कि ‘जंगल कमांडो’ के जरिए अब शिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी। ड्रोन निगरानी और इंटेलिजेंस सिस्टम के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। यह कदम न केवल बाघों की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली को भी मजबूत करेगा।
Read Also:-
From debt and jail to IPL glory, Mukul Choudhary’s emotional rise powered by his father’s sacrifice