उत्तरप्रदेश का ऐसा मंदिर, जहां बिना दर्शन किए लोग नहीं करते शादी!

Kariyabajhna Baba Temple

उत्तरप्रदेश का ऐसा मंदिर, जहां बिना दर्शन किए लोग नहीं करते शादी!

The Kariyabajhna Baba Temple in Sultanpur, Uttar Pradesh, is a unique center of faith with traditions that challenge the modern era.

उत्तरप्रदेश का ऐसा मंदिर जहां बिना दर्शन किए लोग नहीं करते शादी

उत्तरप्रदेश का ऐसा मंदिर, जहां बिना दर्शन किए लोग नहीं करते शादी! |

Kariyabajhna Baba Temple: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में स्थित करिया बझना बाबा का मंदिर आस्था का एक ऐसा अनूठा केंद्र है, जहां की परंपराएं आज भी आधुनिक युग को चुनौती देती नजर आती हैं। 500 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी मान्यताओं को लोग अटूट विश्वास के साथ निभा रहे हैं।

'बाबा' की अनुमति बिना नहीं जाती बारात

सुल्तानपुर जिला मुख्यालय से लगभग 24 किलोमीटर दूर अंबेडकर नगर रोड पर स्थित करिया बझना बाबा का स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है। लगभग 5 सदी पुराने इस स्थान की सबसे बड़ी विशेषता यहां की वैवाहिक परंपराएं और मन्नत पूरी होने पर घंटी चढ़ाने की प्रथा है।

बिना दर्शन नहीं निकलती बारात

इस मंदिर की खास मान्यता, स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, क्षेत्र में जब भी किसी घर में शहनाई बजती है, तो बारात निकलने से पहले दूल्हा और उसका परिवार बाबा के दरबार में हाजिरी जरूर लगाता है।

 माना जाता है कि बाबा का आशीर्वाद लिए बिना विवाह की रस्में अधूरी रहती हैं और उनकी अनुमति के बाद ही वैवाहिक यात्रा सफल और मंगलमय होती है।


 
500 साल पुराना नीम का पेड़

मंदिर परिसर में एक अत्यंत प्राचीन नीम का पेड़ मौजूद है, जिसे ग्रामीण अपनी कई पीढ़ियों से देखते आ रहे हैं। इस पेड़ की उम्र करीब 400 से 500 साल बताई जाती है। यह विशालकाय पेड़ न केवल छाया देता है, बल्कि भक्तों की मुरादों का गवाह भी है।

हजारों घंटियों का रहस्य

इस प्राचीन नीम के पेड़ पर टंगी हजारों घंटियां यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।  

जब भक्त कोई मनोकामना लेकर यहां आते हैं, तो मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद, आभार प्रकट करने के लिए श्रद्धालु यहां आकर पीतल की घंटी चढ़ाते हैं। यही वजह है कि आज पूरा पेड़ और मंदिर परिसर घंटियों से भरा पड़ा है।

मंगलवार का विशेष महत्व  

वैसे तो यहां प्रतिदिन श्रद्धालु आते हैं, लेकिन मंगलवार का दिन बाबा को समर्पित होता है।


 
इन खास दिनों में यहां भव्य मेलों और भंडारों का आयोजन होता है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त दूर-दराज से प्रसाद ग्रहण करने और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
 

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