नेपाल: Gen-Z की पसंदीदा महिला पीएम बनीं सुशीला कार्की

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नेपाल: Gen-Z की पसंदीदा महिला पीएम बनीं सुशीला कार्की

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राजनीति से जज तक का सफर, पति का हाईजैक विवाद

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नेपाल की पहली महिला पीएम सुशीला कार्की का ऐतिहासिक सफर

नेपाल के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ चुका है। सुशीला कार्की, जो पहले नेपाल सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस रह चुकी हैं, अब नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बन गईं हैं। शुक्रवार की रात, उन्हें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शपथ दिलाई, और इस प्रकार उन्होंने नेपाल की राजनीति में एक नई मिसाल कायम की। सुशीला के इस करियर का सफर बेहद प्रेरणादायक है। एक साधारण शिक्षक से लेकर सुप्रीम कोर्ट की जज तक का उनका सफर न केवल उनके आत्मविश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह उस बदलाव का भी हिस्सा है जो नेपाल की राजनीति और न्यायपालिका में आ रहा है।

महाभियोग का सामना, जनता के बीच लोकप्रियता

सुशीला कार्की का नाम तब सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया जब 2017 में प्रचंड सरकार ने उन्हें महाभियोग के जरिए पद से हटाने की कोशिश की थी। कारण यह था कि कार्की अपने फैसलों में राजनीतिक दबाव के खिलाफ खड़ी हो रही थीं, और उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सख्ती से पालन किया था।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

जब महाभियोग का प्रस्ताव संसद में लाया गया, तो सुशीला के समर्थन में हजारों लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर आए। छात्र, महिलाएं, और आम लोग सब उनके साथ खड़े थे। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि जब तक महाभियोग पर सुनवाई पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें काम करने से नहीं रोका जा सकता। इसके परिणामस्वरूप, सरकार को मजबूरन महाभियोग प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।

हाईप्रोफाइल फैसले और सरोगेसी पर रोक

सुशीला का करियर केवल राजनीतिक हस्तक्षेप तक सीमित नहीं था। उन्होंने नेपाल में सरोगेसी पर भी अहम फैसला दिया था। 2015 में, जब नेपाल में सरोगेसी को व्यवसायिक रूप से फैलने का खतरा था, तो सुशीला कार्की की बेंच ने इस पर रोक लगा दी थी। उनका यह कदम न केवल नेपाल, बल्कि समूचे दक्षिण एशिया में एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया था।
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उनके फैसले से नेपाल सरोगेसी टूरिज्म का केंद्र बनने से बच गया, और सरकार को इस पर नए कानून बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी का विवादित अतीत

सुशीला कार्की का व्यक्तिगत जीवन भी उतना ही दिलचस्प और विवादित रहा है। उनका विवाह दुर्गा प्रसाद सुबेदी से हुआ था, जो 1973 में नेपाल के इतिहास की पहली हाईजैकिंग में शामिल थे। दुर्गा ने भारत के बिहार में एक विमान को हाईजैक किया था, जिसमें 22 लोग सवार थे। इस हाइजैकिंग का उद्देश्य बिराटनगर से लाई गई सरकारी नकदी को लूटना था, ताकि राजशाही के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन को मजबूत किया जा सके। यह घटना नेपाल के इतिहास में सबसे बड़ी हाईजैकिंग मानी जाती है, और भारत में भी इसने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस हाईजैकिंग में अभिनेता सीपी लोहानी और अभिनेत्री माला सिन्हा भी सवार थे,

लेकिन....

किसी को भी नुकसान नहीं हुआ। एक साल बाद दुर्गा को भारत में गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें दो साल की सजा हुई, लेकिन आपातकाल के दौरान उन्हें रिहा कर दिया गया।

शादी से लेकर राजनीति तक: सुशीला की संघर्षों की कहानी

जब दुर्गा प्रसाद सुबेदी का नाम उभरता है, तो उनकी पत्नी सुशीला कार्की की पहचान भी विवादों से जुड़ी हुई दिखाई देती है। बावजूद इसके, सुशीला ने खुद को राजनीतिक दबाव और घरेलू विवादों से अलग रखकर अपनी पहचान बनाई। आज, वे नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन चुकी हैं, और उनकी यह सफलता देश की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है।

कठिनाइयों का सामना और सच्चाई के रास्ते

सुशीला के फैसले और उनके जीवन की कहानी यह सिद्ध करती है कि कठिनाइयों का सामना करने और सच्चाई के रास्ते पर चलने का फल देर से ही सही, जरूर मिलता है।

अब,

वे नेपाल के राजनीति के शीर्ष पर बैठकर देश की दिशा को प्रभावित करेंगी, और शायद उनका साहस और ईमानदारी आने वाले दिनों में समाज और राजनीति में और भी बदलाव ला सके।
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एक महिला के संघर्ष की मिसाल

सुशीला कार्की का जीवन संघर्ष, समर्पण और न्याय के प्रति निष्ठा की मिसाल है। राजनीति हो या न्यायपालिका, उनके फैसले हमेशा से ही साहसिक और जनता के हक में रहे हैं।

अब, जब वे नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं,

तो उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उनका सफर हमें यह सिखाता है कि अगर आप अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको रोक नहीं सकती।
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