बीजिंग में कहर बनकर बरसी बारिश: बाढ़-भूस्खलन से 34 की मौत

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बीजिंग में कहर बनकर बरसी बारिश: बाढ़-भूस्खलन से 34 की मौत

बीजिंग में कहर बनकर बरसी बारिश बाढ़-भूस्खलन से 34 की मौत

80 हजार लोगों का जीवन बेपटरी

कभी आपने किसी शहर को अचानक अपनी रफ्तार से रुकते देखा है? बीजिंग एक ऐसा शहर जो दुनिया की सबसे तेज़ रफ्तार में चलने वालों में गिना जाता है इन दिनों थम गया है। वजह है वो तबाही, जो आसमान से आई है। ज़मीन खिसकी, पुल बह गए, सड़कें टूट गईं, और लोगों की ज़िंदगी… वो जैसे एक झटके में बदल गई। China Floods And Landslides Kill 34, Over 80,000 Evacuated In Beijing अब तक बाढ़ और भूस्खलन से 34 लोगों की जान जा चुकी है, और हजारों बेघर हो गए हैं। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। इनमें वे बच्चे हैं, जिनके स्कूल बंद हो गए। वो बुजुर्ग हैं, जो हर सुबह नदी किनारे टहलते थे और अब उसी नदी ने उनका घर लील लिया। वो मांएं हैं, जो बरसते पानी में बच्चों को छाती से चिपकाकर किसी ऊंची जगह की तरफ दौड़ पड़ीं।

बुलडोजर पर बैठकर आई राहत

बीजिंग के मियुन और यानछिंग जैसे इलाके, जो आमतौर पर शहरी शोरगुल से दूर शांत से रहते हैं, इन दिनों खौफ के मंजर से जूझ रहे हैं। मियुन में 28 मौतें, यानछिंग में 2, और पास के हपेई प्रांत में भूस्खलन के चलते 4 लोगों की जान गई है। सोचिए, जब बचावकर्मी लोगों को बुलडोजर पर बैठाकर बाहर निकालते हैं, तो हालात कितने बिगड़ चुके होते हैं। या जब किसी को प्लास्टिक के टब में डालकर नदी पार करवाई जाती है तो आप जान जाते हैं कि अब ये बस पानी नहीं, मौत बन चुका है।

80 हज़ार लोगों को निकाला गया, लेकिन दर्द वहीं है

अब तक 80,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से 17,000 लोग सिर्फ मियुन जिले से हैं। हर कोई बस एक सवाल पूछ रहा है "अब हम कहां जाएंगे?" अस्पतालों में बिस्तर कम पड़ रहे हैं। राहत शिविरों में भीड़ है, और मन में डर है। लोग अपनों को ढूंढ रहे हैं कहीं वो बहती सड़क के उस पार हैं या मलबे के नीचे? China Floods And Landslides Kill 34, Over 80,000 Evacuated In Beijing

जब स्कूल बंद हो जाएं और पुल ढह जाएं

बीजिंग के हुआइरोउ जिले में एक पुल ढह चुका है। कई सड़कें या तो बंद हैं या टूट चुकी हैं। सरकार ने ‘टॉप लेवल इमरजेंसी’ घोषित कर दी है। स्कूल, निर्माण कार्य, यहां तक कि आम जनजीवन भी ठहर गया है। इस शहर ने पिछले कुछ दशकों में सब कुछ देखा तेज़ी से बनते फ्लाईओवर, टेक्नोलॉजी की ऊंचाइयाँ, ओलंपिक की चमक। लेकिन अब, सिर्फ बारिश की आवाज़ है… और उसके बाद की खामोशी।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा: “कोई कसर न छोड़ी जाए”

ये संकट सिर्फ बीजिंग तक सीमित नहीं। हपेई प्रांत, शांक्सी, और कई दूसरे इलाकों में भी हालात बिगड़े हैं। शी जिनपिंग ने साफ निर्देश दिए हैं "लापता लोगों की तलाश में कोई कसर न छोड़ें। जानमाल के नुकसान को हर हाल में कम किया जाए।" सरकार ने हपेई को 50 मिलियन युआन की इमरजेंसी सहायता भेजी है, और रेस्क्यू टीमों को ज़मीनी स्तर पर भेजा गया है। लेकिन जब पानी आपके दरवाज़े के अंदर घुस जाए, तो राहत की सबसे बड़ी ज़रूरत होती है मानवता, हमदर्दी, और एक-दूसरे का साथ। China Floods And Landslides Kill 34, Over 80,000 Evacuated In Beijing

एक सवाल जो हर दिल में है…

हर साल बारिश आती है। कभी राहत बनकर, तो कभी तबाही बनकर। लेकिन क्या हम सीखते हैं? क्या हमारे शहर, जो ऊँची इमारतों और चौड़ी सड़कों से घिरे हैं, उतने ही मज़बूत हैं जब कुदरत अपनी असली ताक़त दिखाती है? बीजिंग का ये संकट हमें याद दिलाता है कि प्रकृति को हल्के में नहीं लिया जा सकता। और यह भी कि, चाहे तकनीक कितनी भी बढ़ जाए, अंत में हमें ज़मीन पर चलना होता है उसी ज़मीन पर जो आज फिसल रही है। Read More:- इंडिगो फ्लाइटः युवक को आया पैनिक अटैक, यात्री ने जड़ दिया थप्पड़ Watch Now :-कुल्लू जिले में लगातार बारिश और अचानक आई बाढ़

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