‘बोस्टन ब्राह्मण’ कौन हैं और क्यों कोल्डप्ले विवाद के बाद सुर्खियों में आए

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‘बोस्टन ब्राह्मण’ कौन हैं और क्यों कोल्डप्ले विवाद के बाद सुर्खियों में आए

 ‘बोस्टन ब्राह्मण’ कौन हैं और क्यों कोल्डप्ले विवाद के बाद सुर्खियों में आए

कौन हैं अमेरिका की ये रहस्यमयी कुलीन जाति? 

हाल ही में अमेरिका के बॉस्टन में कोल्डप्ले कॉन्सर्ट के दौरान एक 2 सेकेंड का वीडियो वायरल हुआ जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। वीडियो में डेटा स्टार्टअप ‘एस्ट्रोनॉमर’ के CEO एंडी बायरन अपनी कंपनी की HR हेड क्रिस्टी कैबोट के साथ रोमांटिक मूड में दिखाई दिए। बड़ा ट्विस्ट ये है कि क्रिस्टी कैबोट के पति एंड्रयू कैबोट न सिर्फ एक रम कंपनी के मालिक हैं, बल्कि वे अमेरिका के मशहूर ‘बोस्टन ब्राह्मण’ परिवार से ताल्लुक रखते हैं। अब सभी जानना चाहते हैं कौन हैं ये ‘बोस्टन ब्राह्मण’?

अमेरिका की 'ब्राह्मण जाति' कौन हैं ये?

‘बोस्टन ब्राह्मण’ शब्द पहली बार 1861 में डॉक्टर और लेखक ओलिवर वेंडेल होम्स सीनियर ने इस्तेमाल किया था। उन्होंने अमेरिका के उत्तर-पूर्वी उच्च वर्गीय परिवारों को ‘ब्राह्मण कास्ट ऑफ न्यू इंग्लैंड’ कहा यानी भारत की ब्राह्मण जाति की तरह बौद्धिक, विशिष्ट और कुलीन।

इतिहास

  • 1600 के दशक में ब्रिटिश प्यूरिटन धर्म सुधारकों के वंशज अमेरिका आए
  • ये लोग न्यू इंग्लैंड (Boston) में बसे और व्यापार, राजनीति, शिक्षा में ऊंचा नाम कमाया
  • हार्वर्ड (1636) और येल (1701) यूनिवर्सिटी की स्थापना में इनका बड़ा योगदान
  • प्रमुख परिवारों में कैबॉट, पीबॉडी, लोवेल, एडम्स, एलियट आदि शामिल हैं

बौद्धिक श्रेष्ठता और सामाजिक वर्चस्व

बोस्टन ब्राह्मण अपने बौद्धिक स्तर, सांस्कृतिक शुद्धता और कुलीनता को लेकर बेहद गंभीर थे। इनकी जीवनशैली आम अमेरिकियों से बिल्कुल अलग होती थी:
  • खास उच्चारण और बोलचाल
  • सादा मगर प्रभावशाली पहनावा
  • सप्ताहांत पर ‘रोस्ट बीफ’ और सोमवार को कोल्ड रोस्ट खाने की परंपरा
  • केवल अपने ही वर्ग में विवाह करना ‘खून की शुद्धता’ बनाए रखने के लिए

अमेरिकन समाज में इनकी भूमिका

  • शुरुआती अमेरिकी कानून और सामाजिक नियम बनाने में इनका योगदान
  • दास प्रथा को समाप्त करने वाले पहले आंदोलनों का हिस्सा
  • शिक्षा, बैंकिंग, शिपिंग, राजनीति और साहित्य में ऊंचा स्थान
इन परिवारों का मानना था कि ईश्वर ने उन्हें ‘अमेरिकन कल्चर’ का मार्गदर्शक बनने के लिए चुना है।

बदलता समय और ब्राह्मणों का ढलता प्रभाव

20वीं सदी में जब आयरिश, इटालियन और यहूदी प्रवासी बड़ी संख्या में बॉस्टन आए, तब बॉस्टन ब्राह्मणों का सामाजिक वर्चस्व कमजोर होने लगा। नई संस्कृति, मिक्स मैरिज और बाहरी प्रभावों ने इस विशिष्ट वर्ग को सीमित और अप्रासंगिक बना दिया, हालांकि आज भी कुछ पुराने परिवार जैसे कैबॉट्स ब्रांडेड कंपनियों, यूनिवर्सिटी बोर्ड्स और ऐतिहासिक संस्थानों में अपनी जगह बनाए हुए हैं

कोल्डप्ले कॉन्सर्ट कांड: ब्राह्मण नाम फिर क्यों आया चर्चा में?

  • CEO एंडी बायरन और HR क्रिस्टी कैबोट के अफेयर का वीडियो वायरल
  • कंपनी ने दोनों को छुट्टी पर भेजा; CEO ने इस्तीफा भी दिया
  • क्रिस्टी के पति एंड्रयू कैबोट बॉस्टन ब्राह्मण परिवार से
  • इस विवाद ने अमेरिका में 'कुलीनता बनाम नैतिकता' की बहस को हवा दी

वायरल स्कैंडल से इतिहास की परतें खुलीं

कोल्डप्ले कॉन्सर्ट का छोटा सा वीडियो केवल ऑफिस रोमांस की कहानी नहीं थी। उसने एक बार फिर अमेरिका की क्लास-हिस्ट्री, कुलीनता और सामाजिक पहचान की परतें उधेड़ दीं। ‘बोस्टन ब्राह्मण’ भले आज उतने शक्तिशाली न हों, लेकिन उनके नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा और संस्कृति आज भी अमेरिका के शहरी एलीट डिबेट का हिस्सा है। Read More:-PM मोदी की राजनीतिक यात्रा: मोदी ने इंदिरा गांधी का 48 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा! Watch Now :- गाजीपुर में मिला तैरता हुआ '#रामशिला' पत्थर! देखें #रहस्यमयी वीडियो 

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