अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों से आयात होने वाली कुछ विशेष दवाओं और उनसे जुड़े जरूरी ingredients पर 100 प्रतिशत एड-वैलोरम टैरिफ से छूट देने का फैसला किया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के 23 सितंबर के नोटिस में इन देशों को जीरो-टैरिफ के लिए पात्र बताया गया है। यह राहत सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी, बल्कि तय श्रेणियों की specialty pharmaceuticals पर ही मिलेगी।
किन दवाओं को मिलेगी राहत?
जीरो प्रतिशत टैरिफ की श्रेणी में दुर्लभ बीमारियों के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा-डिराइव्ड थेरेपी, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल और जीन थेरेपी तथा एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स शामिल हैं। कुछ मेडिकल काउंटरमेजर्स और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी फार्मास्युटिकल दवाओं को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। इन उत्पादों से जुड़े कुछ ingredients पर भी यह प्रावधान लागू होगा।
भारत समेत 20 देश सूची में
अमेरिकी नोटिस के मुताबिक भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड-लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम इस जीरो-टैरिफ व्यवस्था के पात्र हैं।
100% टैरिफ का क्या है मामला?
अमेरिका ने अप्रैल 2026 में कुछ patented pharmaceutical products और उनसे जुड़े ingredients पर 100 प्रतिशत एड-वैलोरम टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह शुल्क कुछ कंपनियों के लिए 31 जुलाई से और अन्य कवर की गई कंपनियों के लिए 29 सितंबर से प्रभावी होना था। वहीं, अमेरिकी नियमों के अनुसार generic pharmaceutical products और उनके संबंधित ingredients इस Section 232 टैरिफ के दायरे में नहीं हैं।
भारत के फार्मा निर्यात के लिए अहम फैसला
भारत अमेरिका के लिए एक प्रमुख दवा आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में विशेष श्रेणी की दवाओं और उनके ingredients पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत शुल्क से छूट मिलने से इन उत्पादों के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क का असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह राहत भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली हर दवा पर लागू नहीं है और पात्रता उत्पाद की निर्धारित श्रेणी और अमेरिकी नियमों पर निर्भर करेगी।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने यह भी व्यवस्था की है कि ऐसे specialty pharmaceutical products, जो अमेरिका में किसी urgent health need को पूरा करते हैं, उनके लिए कंपनियां अलग से जीरो-टैरिफ मंजूरी का अनुरोध कर सकती हैं।