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andhra goa social media ban: फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया की राह पर भारत: आंध्र-गोवा में बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी

andhra goa social media ban फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया की राह पर भारत आंध्र-गोवा में बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी

andhra goa social media ban: बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के बढ़ते असर को लेकर दुनिया भर में चिंता गहराती जा रही है। फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब भारत में भी इस दिशा में सख्त कदम उठाने की चर्चा तेज हो गई है। आंध्र प्रदेश और गोवा की सरकारें 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की तैयारी कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर औपचारिक फैसला लिया जा सकता है।

andhra goa social media ban: भारत में भी उठी बैन की मांग

भारत में भी इस मुद्दे पर बहस नई नहीं है। बीते साल दिसंबर में मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था कि ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर भारत में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने पर विचार किया जाना चाहिए. मदुरै बेंच ने यह टिप्पणी नाबालिगों को ऑनलाइन पोर्नोग्राफिक कंटेंट तक आसान पहुंच के मामले में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की थी। याचिकाकर्ता एस. विजयकुमार की ओर से पेश वकील केपीएस पलानीवेल राजन ने अदालत के सामने ऑस्ट्रेलिया के नए कानून का हवाला दिया था। Also Read-Ajit Pawar Funeral: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का आज होगा अंतिम संस्कार!

andhra goa social media ban: फ्रांस में मोबाइल फोन पर भी पाबंदी

फ्रांस में सोशल मीडिया के साथ-साथ हाई स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। वहां संसद में यह विधेयक 130 के मुकाबले 21 मतों से पारित हुआ। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुद इस कानून को जल्द लागू करने की वकालत की थी। अब इसे आने वाले हफ्तों में सीनेट में बहस के लिए भेजा जाएगा। आंध्र प्रदेश सरकार भी इस दिशा में गंभीर नजर आ रही है। राज्य के सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश की अध्यक्षता में गठित सोशल मीडिया पर जीओएम (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन के फायदे और नुकसान पर चर्चा करेगा. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बच्चों के मानसिक विकास, पढ़ाई पर असर, ऑनलाइन कंटेंट की गुणवत्ता और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। गोवा सरकार भी इसी तरह के प्रस्ताव पर काम कर रही है। Also Read-महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत,सीएम साय ने जताया दुख

‘हमारे बच्चों का दिमाग बिकने नहीं देंगे’

नीति से जुड़े जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों के डेटा और व्यवहार को वैश्विक स्तर पर व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। इसी को लेकर यह तर्क सामने आ रहा है कि “हमारे बच्चों का दिमाग अमेरिका या चीन की टेक कंपनियों को नहीं बिकने दिया जाएगा। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन जिस तरह राज्यों और न्यायालयों से लगातार संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ है कि भारत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर जल्द ही कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है।  

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