रक्षाबंधन 2026 तारीख और मुहूर्त

रक्षाबंधन 2026: जानें तारीख, तिथि और भद्रा मुक्त मुहूर्त

रक्षाबंधन 2026 को भद्रा मुक्त पूर्णिमा में मनाया जाएगा। जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की सारी जानकारी इस विशेष लेख में।

By : सोनिया रायकवार
रक्षाबंधन 2026: जानें तारीख, तिथि और भद्रा मुक्त मुहूर्त

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसके सुख, स्वास्थ्य, लंबी आयु और सफलता की कामना करती है। वहीं भाई भी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है। इस साल रक्षाबंधन की तारीख और भद्रा को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। वाराणसी पंचांग के अनुसार, 2026 में रक्षाबंधन भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन 2026 कब है? जानें तारीख और तिथि

रक्षाबंधन: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
पूर्णिमा तिथि शुरू: 27 अगस्त 2026, सुबह 8:31 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 28 अगस्त 2026, सुबह 9:18 बजे

वाराणसी पंचांग के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह 8:31 बजे शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह 9:18 बजे तक रहेगी। ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

27 अगस्त को रहेगी भद्रा, 28 अगस्त को नहीं

रक्षाबंधन के लिए भद्रा की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, 27 अगस्त को सुबह 8:31 बजे से रात 8:54 बजे तक भद्रा रहेगी। यानी 27 अगस्त की रात 8:54 बजे भद्रा समाप्त हो जाएगी।

वहीं, 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा नहीं रहेगी। इसलिए इस बार बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए शुभ समय इस प्रकार बताया गया है:

मुख्य शुभ मुहूर्त:
सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त:
सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक

अगर किसी कारण से सुबह का शुभ मुहूर्त छूट जाए तो अभिजीत मुहूर्त में भी राखी बांधी जा सकती है।

भद्रा को क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?

हिंदू पंचांग में समय को अलग-अलग करणों में बांटा गया है। इन्हीं में से विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा को उग्र प्रकृति वाला समय माना जाता है। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ और अन्य मांगलिक कार्यों में भद्रा की स्थिति का विचार किया जाता है। रक्षाबंधन में भी भद्रा का विशेष महत्व माना जाता है। शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, राखी भद्रा रहित पूर्णिमा में बांधना शुभ माना जाता है। इस बार 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा नहीं है।

राखी बांधते समय बोलें ये मंत्र

राखी बांधते समय इस पारंपरिक रक्षासूत्र मंत्र का जाप किया जा सकता है—

“येन बद्धो बलि राजा दानवेंद्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”

इसका भावार्थ है कि जिस रक्षा सूत्र से शक्तिशाली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से तुम्हें बांधती हूं। यह रक्षा सूत्र हमेशा स्थिर रहे और रक्षा करे।

इसके अलावा भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है।

रक्षाबंधन की सरल पूजा विधि

रक्षाबंधन के दिन भाई-बहन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा की थाली तैयार करें। थाली में ये चीजें रख सकते हैं—

  • रोली या कुमकुम
  • अक्षत
  • फूल
  • दीपक और धूप
  • मिठाई
  • राखी

सबसे पहले भगवान का पूजन करें। इसके बाद भाई को तिलक लगाकर अक्षत लगाएं। दीपक से आरती करें और मंत्र का जाप करते हुए भाई की कलाई पर राखी बांधें। इसके बाद भाई-बहन एक-दूसरे के सुख, स्वास्थ्य और सफलता की कामना करें।

इस दौरान “सर्वे भवन्तु सुखिनः...” मंगल श्लोक का पाठ भी किया जा सकता है।

वाराणसी और मिथिला पंचांग में क्या अंतर?

वाराणसी और मिथिला पंचांग की गणना पद्धति में कुछ अंतर हो सकता है। स्थानीय सूर्योदय और गणना के आधार पर मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव है। हालांकि, 2026 में दोनों परंपराओं के अनुसार रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाए जाने की बात सामने आती है। इसलिए पर्व की मुख्य तारीख को लेकर बड़ा अंतर नहीं है।

रक्षाबंधन का असली महत्व क्या है?

रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं है। यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है। बहन भाई की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है। वहीं भाई भी बहन के प्रति प्रेम, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेता है। राखी का धागा भले ही छोटा हो, लेकिन इससे जुड़ी भावनाएं बहुत गहरी होती हैं। यह त्योहार परिवार को एक साथ लाने और रिश्तों में प्रेम बढ़ाने का अवसर भी देता है।

2026 में भद्रा से मुक्त रहेगा रक्षाबंधन

इस बार रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026 को भद्रा रहित पूर्णिमा में मनाया जाएगा। 27 अगस्त को भद्रा रात 8:54 बजे तक रहेगी, जबकि 28 अगस्त को राखी बांधने के समय भद्रा की बाधा नहीं होगी। इसलिए रक्षाबंधन के इस पावन पर्व को भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सम्मान के साथ मनाएं और परिवार के सुख-शांति की कामना करें।

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