पटना में छात्र की मौत, परिजनों का आरोप - लाश रखकर बिल बनाता रहा अस्पताल, तोड़फोड़

छात्र की मौत पर हंगामा

पटना में छात्र की मौत, परिजनों का आरोप - लाश रखकर बिल बनाता रहा अस्पताल, तोड़फोड़

पटना के पारस अस्पताल में एक छात्र की मौत के बाद परिजनों ने तोड़फोड़ की और अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगाए।

पटना में छात्र की मौत परिजनों का आरोप -   लाश रखकर बिल बनाता रहा अस्पताल तोड़फोड़

अस्पताल में छात्र की मौत |

पटना के राजा बाजार स्थित पारस अस्पताल में 9वीं के छात्रा की मौत हो गई। इसके बाद परिजन ने जमकर हंगामा किया। परिजन ICU बेड, वेंटिलेटर लेकर ही सड़क पर उतर गए और विरोध जताया।

तोड़फोड़ और पत्थरबाजी

अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिसर में जमकर तोड़फोड़ और पत्थरबाजी भी की। परिजन का कहना था कि बच्चा मर चुका था फिर भी उसे जिंदा बताकर अस्पताल ने लाखों रुपए ऐंठे। मृतक छात्रा विशाल के इलाज में 2 लाख खर्च हुए। परिवार ने कर्ज लेकर पैसे जमा कराए, लेकिन इलाज सही से नहीं होने पर विशाल बच नहीं पाया। मृतक अपने घर का इकलौता बेटा था, पटना अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रहा था। 

सिर पर मरा बैट

दरअसल, रविवार शाम महुआबाग में खेलने के दौरान लड़कों में किसी बात पर झगड़ा हो गया। इस विवाद में विशाल को रिटायर्ड दारोगा के बेटे ने बैट से सिर पर मार दिया। इसके बाद वह बेहोश हो गया। बेहोशी के हालत में परिजन विशाल को पटना के पारस अस्पताल में लगभग 5:30 बजे एडमिट कराया। मृतक विशाल के पिता ऋषि चौहान लुधियाना में मजदूरी करते हैं। विशाल बचपन से ही नानी घर रहता था।

2 लाख का खर्चा

परिजनों के पास इलाज कराने के पैसे नहीं थे। जैसे तैसे 10% के ब्याज पर 2 लाख का कर्ज लिया। अस्पताल पहुंचने के साथ ही काउंटर पर 1,35000 कैश जमा कराए। इलाज में 2 लाख खर्च हो गए, लेकिन जिस तरीके से इलाज होना चाहिए था, वह अस्पताल में नहीं हो पाया। यहां तक कि वक्त-वक्त पर डॉक्टर भी नहीं मौजूद थे। अस्पताल की पर्ची के अनुसार, विशाल को न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट में एडमिट कराया गया था। डॉक्टर पेशेंट को देख रहे थे। एडमिशन डेट 26 अप्रैल शाम 6:45 बजे लिखी है। 

मौत के बाद भी इलाज

आरोप है कि विशाल की मृत्यू हो चुकी थी फिर भी रातभर वेंटिलेटर पर रखा गया और किसी परिजन को मिलने नहीं दिया गया। डॉक्टर के हर विजिट के 1810 रुपये चार्ज लिए गए हैं। CBC के 963.90 रुपए, अस्पताल की ओर से 1 दिन के जनरल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के नाम पर 4570 रुपए वसूले गए हैं। यहां तक की डाइट चार्ज के भी 650 लिए गए। 

अस्पताल की सफाई

वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्चे के सिर पर चोट थी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल आया था। किडनी निकालने और पैसा बकाया की वजह से शव नहीं देने का आरोप बिल्कुल निराधार है। डॉक्टर्स की कोई लापरवाही नहीं है। वहीं पुलिस ने बैट मारने वाले एक आरोपी को गिरफितार कर लिया है। 

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