शनि देव की पूजा के नियम

शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तन क्यों वर्जित हैं?

हिंदू धर्म में शनि देव को 'न्यायाधीश' माना गया है, जिनकी पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग वर्जित है क्योंकि तांबा सूर्य देव की धातु है।

By : हेमा गुप्ता
शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तन क्यों वर्जित हैं?

शनि देव की पूजा में क्यों वर्जित हैं तांबे के बर्तन?

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को 'न्यायाधीश' और 'कर्मफल दाता' माना गया है। मान्यता है कि शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार का दिन उनकी आराधना के लिए विशेष माना जाता है। खासकर वे लोग जो साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव से गुजर रहे हैं, उनके लिए शनिवार का व्रत और पूजा किसी वरदान से कम नहीं होती।

हालांकि, शनि देव की पूजा के कुछ कड़े नियम हैं, जिनमें से एक सबसे महत्वपूर्ण नियम है—पूजा में तांबे के बर्तनों का वर्जित होना। 

सूर्य और शनि का आपसी संबंध

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, सूर्य देव और शनि देव पिता-पुत्र होने के बावजूद एक-दूसरे के प्रति शत्रुता का भाव रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में तांबा धातु का संबंध सीधे तौर पर सूर्य देव से माना गया है। यही कारण है कि सूर्य को अर्घ्य देते समय हमेशा तांबे के लोटे का उपयोग किया जाता है।

तांबे के उपयोग से क्यों क्रोधित होते हैं शनि देव?

तांबा सूर्य की धातु है, इसलिए शनि देव की पूजा में इसका उपयोग करना उनके शत्रु (सूर्य) के प्रतीक को शामिल करने जैसा माना जाता है। मान्यता है कि यदि कोई भक्त शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का प्रयोग करता है, तो शनि देव प्रसन्न होने के बजाय क्रोधित हो सकते हैं। इससे पूजा का शुभ फल प्राप्त नहीं होता और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।

लोहे के बर्तनों का महत्व

शनि देव की प्रिय धातु लोहा है। ज्योतिष के अनुसार, लोहा और स्टील (जो लोहे का ही एक रूप है) शनि देव से संबंधित धातुएं हैं। इसलिए शनि देव का अभिषेक या उनकी पूजा करते समय लोहे के बर्तनों का ही उपयोग करना चाहिए।

शनि देव को प्रसन्न करने के अन्य उपाय

1. तेल चढ़ाने या दीपक जलाने के लिए लोहे के पात्रों का चुनाव करें।

2. शनि देव की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसका दान करना अत्यंत फलदायी होता है।

3. शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीप दान करने से भी शनि दोषों से मुक्ति मिलती है।
 

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