उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान निकलने वाली भगवान महाकाल की पारंपरिक सवारियों का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। इस वर्ष पहली श्रावण सवारी 3 अगस्त को निकलेगी, जबकि अंतिम राजसी (शाही) सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी। श्रावण मास में चार और भादौ मास में दो सवारियां आयोजित होंगी। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और दर्शन व्यवस्था की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जानिए कब निकलेगी कौन-सी सवारी
महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अनुसार पहली सवारी 3 अगस्त, दूसरी 10 अगस्त, तीसरी 17 अगस्त, चौथी 24 अगस्त, पांचवीं 31 अगस्त और अंतिम राजसी (शाही) सवारी 7 सितंबर को निकलेगी। हर सवारी से पहले मंदिर के सभा मंडप में भगवान महाकाल का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा।
इन मार्गों से गुजरेगी महाकाल की पालकी
पूजन के बाद भगवान महाकाल की पालकी पारंपरिक मार्ग से महाकाल लोक, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी। इसके बाद रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर और गुदरी बाजार से होकर वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी। वहीं, 7 सितंबर को निकलने वाली शाही सवारी में टंकी चौराहे से आगे मिर्जा नईम बेग मार्ग, तेलीवाड़ा, कंठाल, सती गेट और सराफा मार्ग को भी शामिल किया गया है।
श्रद्धालुओं की सुविधा पर रहेगा विशेष फोकस
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सवारी मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, कांवड़ यात्रियों की सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं और वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। प्रशासन का कहना है कि इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, इसलिए सभी विभागों को समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।