29 जुलाई को दुर्लभ शुभ योगों में मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व

29 जुलाई को दुर्लभ शुभ योगों में मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा

29 जुलाई को भोपाल में गुरु पूर्णिमा पर विशेष योग और राजयोग के संयोग से इसे अत्यंत शुभ माना जा रहा है। 5 हजार से अधिक श्रद्धालु गुरु की पूजा में शामिल होंगे।

29 जुलाई को दुर्लभ शुभ योगों में मनाई जाएगी गुरु पूर्णिमा

राजधानी भोपाल में इस वर्ष 29 जुलाई को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा को लेकर धार्मिक और आध्यात्मिक संस्थाओं में तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के 18 से अधिक आश्रमों, मंदिरों और आध्यात्मिक केंद्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां हजारों श्रद्धालु अपने गुरु का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इस बार ज्योतिषीय दृष्टि से भी गुरु पूर्णिमा बेहद विशेष मानी जा रही है, क्योंकि कई शुभ और राजयोग एक साथ बन रहे हैं।

5 हजार से अधिक श्रद्धालु करेंगे गुरु पूजन

गायत्री शक्ति पीठ परिवार, करुणाधाम आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, मां चामुंडा दरबार, ज्योतिष मठ संस्थान समेत शहर के कई धार्मिक केंद्रों पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव आयोजित होंगे। आयोजकों के अनुसार इस बार 5 हजार से अधिक शिष्य अपने गुरुओं को गुरुदक्षिणा अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेंगे।श्रद्धालु गुरु चरण पूजन, आशीर्वाद, सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचनों में शामिल होंगे। कई स्थानों पर सामूहिक भजन, हवन और भंडारों का भी आयोजन किया जाएगा।

इस बार बन रहे हैं कई दुर्लभ शुभ योग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर मंगल, बुध, गुरु और शनि की अनुकूल स्थिति के कारण कई शुभ योग बन रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • रूचक योग

  • भद्र योग

  • हंस योग

  • शश राजयोग

इन योगों में गुरु की आराधना, चरण वंदना और गुरु मंत्र ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

गुरु मंत्र लेने का शुभ मुहूर्त

गुरु पूर्णिमा के दिन इंद्र योग प्रातःकाल से लेकर दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में गुरु मंत्र ग्रहण करना विशेष फलदायी माना जाता है।

इन प्रमुख स्थानों पर होंगे आयोजन

भोपाल के कई धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और भंडारों का आयोजन होगा। प्रमुख स्थानों में शामिल हैं—

  • मां पीतांबरा बगलामुखी मंदिर, कोटरा

  • विश्वनाथ मंदिर, पांच नंबर स्टॉप

  • दादाजी धाम, पटेल नगर

  • धूनी वाले दादा दरबार, श्यामला हिल्स

  • गायत्री शक्ति पीठ

  • करुणाधाम आश्रम

  • आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र

  • ज्योतिष मठ संस्थान

  • मां चामुंडा दरबार

क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा?

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को वेदव्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने चारों वेदों का संकलन और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की, इसलिए उन्हें प्रथम गुरु का दर्जा दिया जाता है। इसी कारण इस दिन गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा निभाई जाती है।

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