कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत जहां विकास, तकनीक और इनोवेशन के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान अब भी घुसपैठ और प्रॉक्सी वॉर जैसे हथकंडों का सहारा ले रहा है।
राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि अगर पाकिस्तान भारत की प्रगति के रास्ते में बाधा डालने की कोशिश करता है तो भारतीय रक्षा बल हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, उन्होंने 25 जुलाई को द्रास में कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही।

भारत विकास और आत्मनिर्भरता के रास्ते पर
रक्षा मंत्री ने भारत की बढ़ती तकनीकी और रक्षा क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश तेजी से आधुनिक तकनीक को अपना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा बल भी नई तकनीकों को अपनाते हुए लगातार अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता और रक्षा आधुनिकीकरण पर जोर देते हुए कहा कि सेना को विश्वस्तरीय हथियारों और प्रशिक्षण से लैस करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भारत के रक्षा बल दुनिया की बेहतरीन सेनाओं में शामिल होंगे।
पाकिस्तान की घुसपैठ और प्रॉक्सी वॉर पर चेतावनी
राजनाथ सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध को याद करते हुए यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सुरक्षा चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। उनके मुताबिक, दुश्मन की नीयत में बदलाव नहीं आया है और वह अब भी प्रॉक्सी वॉर और घुसपैठ जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के जवानों के साहस पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश की सेनाएं किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सैनिकों का साहस और देशभक्ति ही देश के नागरिकों को बिना डर अपने सपनों को पूरा करने का आत्मविश्वास देती है।
कारगिल वॉर मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि
राजनाथ सिंह ने द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में ऑपरेशन विजय के वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी। 'शौर्य संध्या' कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति गीतों के बीच शहीदों को याद किया गया। इस दौरान कारगिल युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में अंतर-धार्मिक प्रार्थना, बीटिंग रिट्रीट और राष्ट्रगान का आयोजन हुआ। रक्षा मंत्री ने शहीदों की याद में स्मारक पर दीप भी जलाए।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कारगिल युद्ध में 545 वीरों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें भारतीय सेना के 537, वायुसेना के 5, सीमा सुरक्षा बल के 1 जवान और 2 नागरिक शामिल थे।
'कारगिल स्मारक में दिखता है पूरा भारत'
रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के शहीदों की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि स्मारक पर देश के अलग-अलग हिस्सों से आए जवानों के नाम दर्ज हैं। अलग-अलग धर्मों और क्षेत्रों से आने वाले सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए एक साथ सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि कारगिल की लड़ाई भारत की एकता और सामूहिक शक्ति का भी प्रतीक है। सैनिकों ने समाज और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर देश के लिए लड़ाई लड़ी और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
कारगिल युद्ध ने दुनिया को दिखाई भारतीय सैनिकों की वीरता
कारगिल युद्ध 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने नियंत्रण रेखा के पार भारतीय क्षेत्रों की ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कब्जे वाली चोटियों को वापस लेने के लिए अभियान शुरू किया।
अत्यंत कठिन पहाड़ी परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया और एक-एक कर रणनीतिक चोटियों पर दोबारा नियंत्रण हासिल किया। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार किए बिना अपने कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को वापस हासिल किया।
वायुसेना ने भी निभाई अहम भूमिका
कारगिल संघर्ष के दौरान भारतीय वायुसेना ने भी ऑपरेशन विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद पाकिस्तानी ठिकानों के खिलाफ हवाई अभियान चलाए गए। भारतीय सेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयासों ने युद्ध का रुख भारत के पक्ष में मोड़ने में अहम योगदान दिया।
कारगिल युद्ध ने भारतीय रक्षा व्यवस्था को कई महत्वपूर्ण सबक दिए। इसके बाद सैन्य तैयारियों, निगरानी, खुफिया तंत्र और आधुनिक तकनीक पर भी विशेष जोर बढ़ा।
26 जुलाई को मनाया जाता है कारगिल विजय दिवस
हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1999 में भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की थी। 2026 में देश 27वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है। यह दिन ऑपरेशन विजय के शहीदों के साहस, बलिदान और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को याद करने का अवसर है।
इस साल कारगिल विजय दिवस के कार्यक्रमों के दौरान रक्षा मंत्री ने एक बार फिर साफ संदेश दिया कि भारत शांति और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन देश की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। भारतीय रक्षा बल किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।