Dhumavati Jayanti 2026 Date: कब है धूमावती जयंती? जानिए इनके स्वरुप की कहानी

धूमावती जयंती 2026

Dhumavati Jayanti 2026 Date: कब है धूमावती जयंती? जानिए इनके स्वरुप की कहानी

धूमावती जयंती, जो कि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, विशेष रूप से तंत्र साधना और दुख निवारण के लिए महत्वपूर्ण है।

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Dhumavati Jayanti 2026 Date: कब है धूमावती जयंती? जानिए इनके स्वरुप की कहानी |

Dhumavati Jayanti 2026 Date : धूमावती जयंती 22 जून 2026 को मनाई जाएगी। यह तिथि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को पड़ रही है। दस महाविद्याओं में से सातवीं महाविद्या मां धूमावती की पूजा-आराधना विशेष रूप से तंत्र साधना और दुख निवारण के लिए की जाती है।

धूमावती जयंती कब है?

पंडित जी के अनुसार, पंचांग गणना के मुताबिक ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी 22 जून को है। इस दिन मां धूमावती की जयंती मनाई जाएगी। मां धूमावती को धुएं के समान माना जाता है। जो लोग मानसिक अशांति, भय, शत्रु बाधा से मुक्ति चाहते हैं, वे इस दिन मां की आराधना करते हैं। अमावस्या को विशेष तंत्र साधना की जाती है, लेकिन सामान्य भक्त भी श्रद्धा-भक्ति से मां को प्रसन्न कर सकते हैं।

पौराणिक कथा 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार माता पार्वती को अत्यधिक भूख लगी। उन्होंने भगवान शिव से भोजन मांगा। शिव जी ने कुछ देर प्रतीक्षा करने को कहा, लेकिन भूख के कारण पार्वती जी ने शिव को ही निगल लिया। कुछ समय बाद भगवान शिव उनके शरीर से धुएं के रूप में बाहर निकले। इस घटना के बाद पार्वती जी ने विधवा का रूप धारण कर लिया। तभी से उनका नाम धूमावती पड़ा।

दूसरी कथा के मुताबिक

पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में बिना बुलाए पहुंची थीं और वहां भगवान शिव का अपमान हुआ, तो उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए थे। उस जलते हुए शरीर से जो धुआं और राख शेष बची, उसी धुएं से माँ धूमावती का काला स्वरूप प्रकट हुआ। चूंकि वह माता सती का ही अवशेष थीं, इसलिए उन्हें देवी धूमावती कहा गया।

मां धूमावती का स्वरूप

मां धूमावती का स्वरूप अन्य देवियों से काफी अलग है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, उनके बाल खुले रहते हैं। एक हाथ में सूप (सूपड़ा) और दूसरा वर मुद्रा में होता है। उनका वाहन कौआ है। मां अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

धूमावती धाम

मां धूमावती का प्रमुख मंदिर वाराणसी में स्थित है। काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही उनका धाम है। यहां चकाचौंध नहीं बल्कि गंभीर और शांत वातावरण रहता है। मंदिर में हर समय धूप-दीप जलते रहते हैं, इसलिए इसे धूपचंडी के नाम से भी जाना जाता है।


Note - The information in this article is based on traditional beliefs and scriptures, It is meant only for general awarenes, We do not claim authenticity of any personal faith or ritual.

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