सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, और उत्तर प

चंबल अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 551 लोगों पर कार्रवाई के निर्देश

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध खनन को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई कर कानून का डर भी दिखना चाहिए।

'पहचान हो गई तो हिरासत में क्यों नहीं?'

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में अवैध रेत खनन में सहयोग करने वाले 551 लोगों की पहचान की जा चुकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब आरोपियों की पहचान हो चुकी है तो अब तक उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ एहतियाती हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) जैसे कड़े कदम उठाए जाएं ताकि दूसरों के लिए भी यह एक उदाहरण बने।

प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और चंबल नदी का पारिस्थितिक संतुलन हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि प्रकृति स्वयं अपना संतुलन बनाए रख सकती है, लेकिन मानव हस्तक्षेप और अवैध खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए।

तीनों राज्यों से मांगा कार्रवाई का ब्यौरा

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों ने अवैध खनन रोकने के लिए दर्ज एफआईआर, जब्त किए गए वाहनों और अन्य कार्रवाई की जानकारी अदालत के सामने रखी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और जमीनी स्तर पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा। अदालत ने तीनों राज्यों को सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।

4 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त तय की है। तब तक तीनों राज्यों को अवैध रेत खनन रोकने के लिए उठाए गए ठोस कदमों और कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि कार्रवाई संतोषजनक नहीं रही तो आगे और कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।