महाकालेश्वर मंदिर में अब दक्षिण भारतीय व्यंजन भी प

महाकाल मंदिर में अब मिलेगा दक्षिण भारतीय प्रसाद, इडली-सांभर और पोंगल भी होंगे भोजन प्रसादी का हिस्सा

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंधन ने प्रसाद व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। पहली बार मंदिर के अन्नक्षेत्र में दक्षिण भारतीय व्यंजनों को भी भोजन प्रसादी में शामिल किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को उनकी पसंद के अनुसार सात्विक और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।

हफ्ते में दो दिन मिलेगा दक्षिण भारतीय प्रसाद

महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की नई व्यवस्था इसी सप्ताह से लागू होगी। इसके तहत प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को श्रद्धालुओं को इडली, सांभर, स्टीम राइस और पारंपरिक दक्षिण भारतीय पोंगल प्रसाद के रूप में परोसा जाएगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इससे दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को विशेष सुविधा मिलेगी और उन्हें घर जैसा स्वादिष्ट सात्विक भोजन मिल सकेगा।

अब तक मालवी व्यंजन ही थे मुख्य आकर्षण

अब तक महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में मुख्य रूप से मालवी दाल-बाटी, लड्डू और अन्य पारंपरिक प्रसाद ही वितरित किए जाते थे। लेकिन हर साल बड़ी संख्या में तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल सहित दक्षिण भारत के राज्यों से श्रद्धालु महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उनकी सुविधा और भोजन की पसंद को ध्यान में रखते हुए यह नई पहल शुरू की गई है।

स्वच्छता और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रसाद तैयार करने में गुणवत्ता, शुद्धता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। भोजन पूरी तरह सात्विक होगा और मंदिर की निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किया जाएगा। प्रसाद वितरण की पूरी व्यवस्था भी व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संचालित की जाएगी।

रोज हजारों श्रद्धालु करते हैं भोजन प्रसादी ग्रहण

महाकाल मंदिर का निःशुल्क अन्नक्षेत्र प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी उपलब्ध कराता है। यहां आने वाले भक्त बिना किसी शुल्क के प्रसाद ग्रहण करते हैं। अब दक्षिण भारतीय व्यंजनों के शामिल होने से भोजन प्रसादी की विविधता और भी बढ़ जाएगी, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।

श्रद्धालुओं को मिलेगा घर जैसा स्वाद

मंदिर समिति का मानना है कि यह पहल केवल भोजन की विविधता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। अब महाकाल की नगरी में मालवी स्वाद के साथ-साथ दक्षिण भारतीय सात्विक भोजन का आनंद भी श्रद्धालु प्रसाद के रूप में ले सकेंगे।