पन्ना में खुले आसमान के नीचे सड़ रहा सरकारी धान: बारिश में भीगा अनाज, ढेरों से निकलने लगीं कोंपलें
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से सरकारी अनाज के रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर खरीदी केंद्रों में हजारों क्विंटल धान महीनों से खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। लगातार हो रही बारिश और उचित भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई जगह धान के ढेरों से कोंपलें और छोटे-छोटे पौधे निकल आए हैं। इस घटना ने सरकारी अनाज के संरक्षण और निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
बारिश ने बढ़ाया नुकसान
जानकारी के अनुसार खरीदी केंद्रों में रखा धान लंबे समय से खुले में पड़ा है। लगातार बारिश का पानी धान पर गिरता रहा, लेकिन उसे सुरक्षित गोदामों तक पहुंचाने या तिरपाल जैसी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए समय पर कदम नहीं उठाए गए। नतीजतन धान में नमी बढ़ गई और बड़ी मात्रा में अनाज खराब होने लगा। इससे सरकारी खरीद प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
धान के ढेरों से फूटने लगीं कोंपलें
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई स्थानों पर धान के ढेरों से अंकुर निकल आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा तब होता है, जब धान लंबे समय तक अत्यधिक नमी के संपर्क में रहता है। अंकुरित हो चुका धान अपनी गुणवत्ता खो देता है और उसका उपयोग सीमित हो जाता है। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि भंडारण और रखरखाव में गंभीर लापरवाही हुई है।
लाखों के नुकसान की आशंका, जांच की मांग
सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदकर उसके सुरक्षित भंडारण की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों को सौंपती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते धान का उठाव कर गोदामों में सुरक्षित रखा जाता, तो यह नुकसान टाला जा सकता था। अब बड़ी मात्रा में अनाज खराब होने से शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति होने की आशंका है। मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और लापरवाही की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग भी तेज हो गई है।