फ्रेंडशिप डे की शुरुआत अमेरिका से हुई थी, जिसे हॉल

जानिए कैसे शुरू हुआ फ्रेंडशिप डे मनाने का चलन

दोस्त हमारी जिंदगी का वो हिस्सा होते हैं, जो हर खुशी को दोगुना और हर मुश्किल को थोड़ा आसान बना देते हैं। यही वजह है कि हर साल फ्रेंडशिप डे का लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस दिन दोस्त एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, गिफ्ट देते हैं और पुराने दिनों को याद करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दोस्ती के नाम पर एक पूरा दिन मनाने का आइडिया आखिर आया कहां से था? इसकी शुरुआत किस देश में हुई और कैसे ये पूरी दुनिया तक पहुंच गया? इस सवाल का जवाब काफी दिलचस्प है। दरअसल फ्रेंडशिप डे का सफर अमेरिका से शुरू हुआ, फिर पैराग्वे पहुंचा और आज ये दुनिया के कई देशों में अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है।

दोस्ती के नाम एक दिन..किसने सोचा था

फ्रेंडशिप डे की कहानी करीब 100 साल पुरानी है। सबसे पहले अमेरिका में ये सोच सामने आई कि दोस्तों के लिए भी एक खास दिन होना चाहिए। हॉलमार्क कंपनी बनाने वाले जॉयस हॉल चाहते थे कि लोग इस दिन अपने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजें और उन्हें बताएं कि वो उनकी जिंदगी में कितने खास हैं। हालांकि उस समय कई लोगों को लगा कि इसके पीछे कार्ड बेचने का मकसद है। यही वजह रही कि शुरुआत में इस आइडिया को लोगों ने ज्यादा पसंद नहीं किया।

लोगों ने तुरंत नहीं अपनाया

कुछ साल बाद पैराग्वे नाम के देश में इस सोच को नई उड़ान मिली। साल 1958 में वहां कुछ लोगों ने मिलकर दोस्ती के नाम पर एक खास दिन मनाने की शुरुआत की। उनका मानना था कि दोस्ती सिर्फ दो लोगों के बीच का रिश्ता नहीं है, बल्कि ये अलग-अलग देशों और लोगों को भी करीब ला सकती है। धीरे-धीरे ये सोच दूसरे देशों तक भी पहुंच गई और फ्रेंडशिप डे मनाने का चलन बढ़ने लगा।

फ्रेंडशिप डे में UN का रोल

दोस्ती की इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए साल 2011 में यूएन ने 30 जुलाई को इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे के रूप में मान लिया। इसका मकसद था कि दुनिया के लोग दोस्ती के जरिए एक-दूसरे के और करीब आएं। हालांकि हर देश इस दिन को 30 जुलाई को नहीं मनाता। कई देशों ने अपनी सुविधा के हिसाब से अलग-अलग तारीख चुनी हुई है।

भारत में अगस्त के पहले संडे की कहानी

अगर भारत की बात करें तो यहां फ्रेंडशिप डे अगस्त के पहले संडे को मनाया जाता है। संडे होने की वजह से दोस्तों से मिलने और साथ समय बिताने का मौका भी आसानी से मिल जाता है। 90 के दशक में फ्रेंडशिप बैंड और ग्रीटिंग कार्ड का चलन शुरू हुआ तो ये दिन स्कूल और कॉलेज के बच्चों के बीच तेजी से पसंद किया जाने लगा। अब समय बदल गया है। आज लोग इंस्टाग्राम स्टोरी, रील, फोटो और वीडियो कॉल के जरिए भी अपने दोस्तों को खास महसूस कराते हैं।

दोस्ती के जश्न का सबसे अच्छा बहाना

फ्रेंडशिप डे सिर्फ एक तारीख नहीं है। ये उन दोस्तों को याद करने का दिन है, जो बिना किसी मतलब के हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं। कई बार एक छोटा सा मैसेज, एक फोन कॉल या साथ बिताए कुछ मिनट भी दोस्ती को पहले से ज्यादा मजबूत बना देते हैं। शायद यही वजह है कि समय बदलने के बाद भी फ्रेंडशिप डे का क्रेज आज भी पहले जैसा ही बना हुआ है।