रायपुर में AI गणपति मूर्तियां बनाने से बच रहे मूर्तिकार, पिछले साल के विवाद का असर; हिंदू संगठनों की चेतावनी
गणेश चतुर्थी को लेकर रायपुर में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस बार शहर में गणपति की करीब 15 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। मूर्तिकार दिन-रात भगवान गणेश की प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। हालांकि, इस बार एक खास बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकांश मूर्तिकार AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार डिजाइन वाली गणेश प्रतिमाएं बनाने से बच रहे हैं।
दरअसल, पिछले साल कुछ जगहों पर फिल्मी स्टाइल और AI से तैयार डिजाइन वाली गणेश प्रतिमाओं को लेकर विवाद हुआ था। इस बार हिंदू संगठनों ने पहले ही मूर्तिकारों और गणेश समितियों से धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए पारंपरिक स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित करने की अपील की है।
पारंपरिक स्वरूप की प्रतिमाओं की ज्यादा मांग
रायपुर में इस बार भगवान गणेश के कई अलग-अलग स्वरूपों की प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें शिव रूप, श्रीराम, श्रीकृष्ण, बाल गणेश, बालाजी और अर्धनारीश्वर स्वरूप प्रमुख हैं।
मूर्तिकार यशवंत के मुताबिक, इन पारंपरिक और धार्मिक स्वरूपों की सबसे ज्यादा बुकिंग हो रही है। गणेश समितियों की ओर से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं और कारोबार भी अच्छा चल रहा है। कई मूर्तिकार देर रात तक प्रतिमाओं को रंगने और सजाने में जुटे हुए हैं।
AI डिजाइन से क्यों बच रहे मूर्तिकार?
मूर्तिकारों का कहना है कि AI तकनीक का इस्तेमाल काम को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन धार्मिक प्रतिमाओं के मामले में सावधानी जरूरी है। उनका मानना है कि भगवान गणेश की प्रतिमा केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि लोगों की आस्था का प्रतीक है।
मूर्तिकारों के मुताबिक, सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल होने या कुछ अलग दिखाने के लिए गणेश प्रतिमा के स्वरूप के साथ प्रयोग करना उचित नहीं है। इसलिए इस बार वे पारंपरिक डिजाइन और धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप प्रतिमाएं बनाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
हिंदू संगठनों ने दी चेतावनी
पिछले साल के विवाद को देखते हुए इस बार हिंदू संगठनों ने भी अपनी नजरें टिकाई हुई हैं। हिंदू स्वाभिमान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष विश्वादिनी पांडेय ने कहा कि संगठन की ओर से मूर्तिकारों और गणेश समितियों से अपील की गई है कि पिछले साल की तरह इस बार AI से तैयार ऐसी प्रतिमाएं स्थापित न की जाएं, जिनसे धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका हो।
संगठन का कहना है कि गणेश उत्सव आस्था और परंपरा से जुड़ा पर्व है, इसलिए प्रतिमाओं के स्वरूप को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
धार्मिक भावनाएं आहत होने पर क्या हो सकती है कार्रवाई?
सीनियर एडवोकेट विराट वर्मा के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीक का अपमान करता है या ऐसा कृत्य करता है जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई हो सकती है।
शिकायत मिलने पर पुलिस मामले की जांच करती है। प्रथम दृष्टया अपराध बनता पाए जाने पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
125 साल पुराना है रायपुर का गणेश उत्सव
रायपुर में सार्वजनिक गणेश उत्सव का इतिहास करीब 125 साल पुराना बताया जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, शुरुआत में पुरानी बस्ती, गुढ़ियारी और बनियापारा जैसे इलाकों में सार्वजनिक रूप से गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती थीं। इसके बाद गोलबाजार, सदर बाजार, रामसागरपारा समेत शहर के दूसरे हिस्सों में भी गणेश समितियां बनने लगीं।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में गणेश उत्सव ने धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर लोगों को एकजुट करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने में भी भूमिका निभाई। यही वजह है कि रायपुर में गणेश प्रतिमा को आज भी आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
इस बार परंपरा बनाम AI की चर्चा
गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच रायपुर में इस बार AI तकनीक को लेकर बहस भी देखने को मिल रही है। एक ओर तकनीक के जरिए नए और आकर्षक डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मूर्तिकार और धार्मिक संगठन पारंपरिक स्वरूप को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं।
ऐसे में इस गणेश उत्सव में AI से बनी प्रतिमाओं के बजाय पारंपरिक गणेश प्रतिमाओं की मांग ज्यादा देखने को मिल रही है।