इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर

CM डॉ यादव ने किया इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन,अगले पांच सालों में होगा 20 हजार करोड़ का निवेश

इंदौर और पीथमपुर के बीच नया इकोनॉमिक कॉरिडोर बनेगा जिसमें आईटी, फिनटेक और ग्रीन इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा। इससे एक लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे।

CM डॉ यादव ने किया इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन,अगले पांच सालों में होगा 20 हजार करोड़ का निवेश

इंदौर और पीथमपुर के बीच  20 किलोमीटर लंबे इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा किया गया। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से आईटी, फिनटेक और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे आधुनिक क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा।

एमपीआईडीसी को सहमति-पत्र प्रदान किए

इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में इंदौर के नैनोद में "इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर" के भूमि-पूजन समारोह में भू स्वामियों ने एमपीआईडीसी को सहमति-पत्र प्रदान किए।

इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के हाथों हुआ है। जहा 20 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में अगले पांच सालों में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस इंडस्ट्रियल जोन को बैंकिंग, बीमा, फाइनेंस जैसे अन्य सेक्टरों के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए पहले चरण में दो हजार करोड़ रुपये की राशि मंजूर हुई है, जिसमें से 327 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

एक लाख से अधिक मिलेगा रोजगार

कॉरिडोर के जरिए आईटी, लॉजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस कॉरिडोर से एक लाख से अधिक रोजगार मिलने की संभावना है।

विशेष प्रावधान किए गए

इंदौर के नैनोद से पीथमपुर के बीच बनने वाले इस कॉरिडोर की एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। सरकार की कोशिश है कि यहां परंपरागत उद्योगों के बजाय ऐसे उद्योग विकसित हों, जो भारी मशीनों पर निर्भर न हों। इसी कारण डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं।

आवागमन भी आसान होगा

इस कॉरिडोर के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसानों से जमीन अधिग्रहण की है। लगभग 60 प्रतिशत किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। 60 से 70 मीटर चौड़ाई में इस कॉरिडोर को विकसित किया जाएगा, जिससे इंदौर से पीथमपुर के बीच की दूरी 10 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और आवागमन भी आसान होगा।

तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित

कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर क्षेत्र में उद्योगों के लिए सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से भी जुड़ा होगा, जिसे इंदौर विकास प्राधिकरण ने लगभग 10 साल पहले विकसित किया था। यहां टीसीएस, इंफोसिस जैसी कंपनियों के स्पेशल इकोनॉमिक जोन हैं और तीन बड़े शैक्षणिक संस्थान भी स्थित हैं।

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