उत्तराखंड सरकार अब नई शिक्षा नीति के बाद शिक्षा में समावेशी मॉडल को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में 'समावेशी शिक्षा मिशन-2030' से संबंधित पुस्तकों का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है और सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है।
नई शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) लागू की। अब इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए नवाचार, तकनीक आधारित शिक्षण और समावेशी शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर वर्ग और हर बच्चे को समान मौका मिल सके। CM धामी ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव है। नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों को रटने की संस्कृति से बाहर निकालकर कौशल, नवाचार और व्यावहारिक ज्ञान की ओर ले जाती है। प्रदेश इसी सोच के साथ शिक्षा व्यवस्था में लगातार सुधार कर रहा है।

शिक्षा सामाजिक जिम्मेदारी
CM ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। शिक्षकों, अभिभावकों और समाज को मिलकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा, जहां कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री धामी ने शिक्षा क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते उपयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल संसाधनों, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और प्रशिक्षित शिक्षकों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि राज्य के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके।