मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण ले रहे युवा वन अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वन सेवा सिर्फ सरकारी जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है। वन अधिकारी देश की प्राकृतिक संपदा, जैव विविधता और वन्यजीवों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र है, इसलिए यहां पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।
वन, वन्यजीव एवं जैव विविधता के संरक्षण तथा पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में वन सेवा के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस अवसर पर सभी युवा अधिकारियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। निश्चित तौर पर सभी अधिकारी अपने ज्ञान, कौशल और संवेदनशीलता के साथ… pic.twitter.com/B7BN4BDyuy
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 19, 2026
जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ी जिम्मेदारी
सीएम धामी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती के बीच वन अधिकारियों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने युवा अधिकारियों से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों की जरूरतों और आजीविका का भी ध्यान रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने राज्य में वन संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि करीब 13 हजार एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। उत्तराखंड में देश का पहला समर्पित फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स भी बनाया गया है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास पर जोर
सीएम ने कहा कि विकास परियोजनाओं में पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बनाया गया करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर इसका उदाहरण है। मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बायोफेंसिंग, क्विक रिस्पॉन्स टीम और 24 घंटे सक्रिय वन्यजीव हेल्पलाइन 1926 जैसी व्यवस्थाएं मजबूत की गई हैं। जनहानि पर मुआवजे की राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिसमें जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें और स्थानीय समुदायों की आजीविका भी मजबूत हो। उन्होंने युवा वन अधिकारियों से राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया।