104 हेल्थ हेल्पलाइन उत्तराखंड में सफल

अब मरीज अस्पताल के भरोसे नहीं! 104 हेल्पलाइन खुद पहुंच रही लाभार्थियों तक, 1.38 करोड़ कॉल का रिकॉर्ड

उत्तराखंड की 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने एक दशक में 1 करोड़ 38 लाख कॉल के साथ स्वास्थ्य निगरानी और फॉलोअप सेवाओं में अहम रोल निभाया है।

अब मरीज अस्पताल के भरोसे नहीं! 104 हेल्पलाइन खुद पहुंच रही लाभार्थियों तक, 1.38 करोड़ कॉल का रिकॉर्ड

देहरादून। उत्तराखंड में 104 हेल्थ हेल्पलाइन पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा बन गई है। देहरादून स्थित 104 कॉल सेंटर अब तक 1 करोड़ 38 लाख से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी कॉल कर चुका है। खास बात यह है कि अब यह सिस्टम केवल लोगों की शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि लाभार्थियों से खुद संपर्क कर उनके स्वास्थ्य और उपचार का फॉलोअप भी करता है।

अस्पताल से बाहर भी मरीजों की निगरानी

104 हेल्पलाइन के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी अब अस्पतालों तक सीमित नहीं रही। मरीजों और लाभार्थियों से फोन पर सीधे संपर्क कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति, इलाज और जरूरी सेवाओं की जानकारी ली जाती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाता है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत हुई है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर खास नजर

104 हेल्पलाइन का प्रोएक्टिव ट्रैकिंग सिस्टम इसकी सबसे बड़ी खासियत है। अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण के बाद संबंधित जानकारी कॉल सेंटर तक पहुंचती है। इसके बाद लाभार्थी से संपर्क कर फॉलोअप किया जाता है। गर्भवती महिलाओं की गर्भावस्था के तीसरे महीने से प्रसव तक टीकाकरण और जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी की जाती है। बच्चे के जन्म के बाद करीब डेढ़ साल तक उसके स्वास्थ्य और टीकाकरण पर भी नजर रखी जाती है।

27 स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा पूरा सिस्टम

104 कॉल सेंटर राज्य के सभी 13 जिलों में 27 स्वास्थ्य सेवाओं और कार्यक्रमों से जुड़े लाभार्थियों तक पहुंच बना रहा है। इसमें आयुष्मान भारत, आशा कार्यकर्ता, बाल स्वास्थ्य, डेंगू, ई-संजीवनी, हीमोफीलिया, हेपेटाइटिस, एचआईवी, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था, मातृ स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, टीबी, थैलेसीमिया और मधुमेह जैसी सेवाएं शामिल हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ मिला या नहीं, इसकी भी जांच

104 के जरिए लाभार्थियों से सीधे फीडबैक लिया जाता है। सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ और प्रोत्साहन की जानकारी भी क्रॉस-चेक की जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में पात्र व्यक्ति तक पहुंचा या नहीं। यह व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है।

कॉल सेंटर से बना प्रोएक्टिव हेल्थ सिस्टम

एक दशक में 104 हेल्थ हेल्पलाइन ने महज फोन पर सहायता देने वाले कॉल सेंटर से आगे बढ़कर स्वास्थ्य निगरानी और फॉलोअप का मजबूत सिस्टम तैयार किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक, उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। पहाड़ी राज्य में दूरदराज के लाभार्थियों तक लगातार पहुंच बनाने में 104 हेल्पलाइन अहम भूमिका निभा रही है।

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