"सौरभ शर्मा को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 18 महीने बाद जेल से होगी रिहाई"

सौरभ शर्मा को मिली जमानत

"सौरभ शर्मा को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 18 महीने बाद जेल से होगी रिहाई"

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा की जमानत याचिका मंजूर की, जो 18 महीने से जेल में थे। उन पर काले धन और अवैध संपत्ति के आरोप थे।

quotसौरभ शर्मा को हाई कोर्ट से बड़ी राहत 18 महीने बाद जेल से होगी रिहाईquot

बहुचर्चित सौरभ शर्मा काला धन मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व आरटीओ कांस्टेबल सौरभ शर्मा को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। करीब 18 महीने से जेल में बंद सौरभ शर्मा अब जमानत पर बाहर आ सकेंगे। यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था, जब लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में उनकी कथित अवैध संपत्ति और करोड़ों रुपये के काले धन से जुड़े खुलासे हुए थे।

10 लाख के मुचलके पर होगी रिहाई

हाई कोर्ट ने सौरभ शर्मा को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के स्थानीय जमानती के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले की परिस्थितियों, जांच की स्थिति और आरोपी के लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने को देखते हुए यह राहत दी है। हालांकि, मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

52 किलो सोना और 11 करोड़ नकद से आया था नाम चर्चा में

सौरभ शर्मा का नाम तब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था, जब भोपाल के जंगल में एक वाहन से 52 किलो सोना और करीब 11 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का मामला सामने आया था। इस कार्रवाई के बाद सौरभ शर्मा पर अवैध संपत्ति और काले धन से जुड़े आरोप लगे थे। मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं।

बचाव पक्ष ने रखी ये दलीलें

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान सौरभ शर्मा के बचाव पक्ष ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोप भी तय किए जा चुके हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपी पिछले 18 महीनों से जेल में है, जबकि संबंधित धाराओं में अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है। इन्हीं आधारों पर जमानत की मांग की गई थी।

इन चार आधारों पर मिली जमानत

अदालत ने जमानत देते समय मुख्य रूप से चार बिंदुओं पर विचार किया। इनमें जांच पूरी होना, आरोप तय हो जाना, लंबे समय से जेल में रहना और अपराध में अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान शामिल है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद सौरभ शर्मा की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, अंतिम फैसला निचली अदालत में चल रही न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आएगा।

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