पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में शामिल हुए। माटी संस्था की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य, शिक्षा और सामाजिक योगदान को रेखांकित किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की पहचान उसकी विविध भाषाओं और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से है। प्रदेश में बज्जिका, मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएं बोली जाती हैं, जो बिहार की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।
बिहार-UP की साझा संस्कृति का जिक्र
सीएम सम्राट चौधरी ने पूर्वांचल को बिहार और उत्तर प्रदेश, दोनों के संदर्भ में देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की साझा सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संसाधन देश को विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि माटी महोत्सव जैसे आयोजनों के जरिए लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए।
‘अपनी माटी का फर्ज निभाना है’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी सभी की है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी माटी का फर्ज निभाना है और अपनी माटी का ऋण लौटाना है।” महोत्सव में पूर्वांचल के खान-पान, लोकगीत-संगीत, परिचर्चा, मिलना-मिलाना और ‘माटी सम्मान’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा गया।
अलग-अलग क्षेत्रों की हस्तियों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। इनमें लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी, पूर्व क्रिकेटर सैयद सबा करीम, श्वेता सिंह, बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी ब्रजेश कुमार सिंह, पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह, चिकित्सक डॉ. राजीव रंजन, शशांक कुमार और फुटबॉल खिलाड़ी मधु कुमारी शामिल रहे। मालिनी अवस्थी ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मनोरंजन किया।
नालंदा की ज्ञान परंपरा का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने बिहार के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि इस धरती ने देश और दुनिया को कई महान व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मभूमि, भगवान महावीर की कर्मभूमि और भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जुड़ी बिहार की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया। उन्होंने नालंदा के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों वर्ष पहले बिहार शिक्षा और ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र था। नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की संस्कृति और ज्ञान परंपरा की समृद्धि को नालंदा के इतिहास से समझा जा सकता है। कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, सांसद और माटी संस्था के संरक्षक जगदम्बिका पाल, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, माटी संस्था के संयोजक आसिफ आजमी और दानिश इकबाल समेत कई लोग मौजूद रहे।